उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) में बीते आठ साल से चला आ रहा राजनीतिक सूखा जल्द खत्म हो सकता है। प्रदेश की भजनलाल सरकार पंचायतीराज चुनावों के संपन्न होने के तुरंत बाद इसी साल दिसंबर तक यूडीए के नए चेयरमैन की राजनीतिक नियुक्ति कर सकती है। नवंबर 2018 में रवींद्र श्रीमाली के हटने के बाद से अब तक प्राधिकरण की कमान प्रशासनिक अफसरों (पूर्व में कलेक्टर व वर्तमान में संभागीय आयुक्त) के पास ही रही है। लेकिन नगरीय निकाय चुनावों से ठीक पहले यानी डेढ़ माह पूर्व पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और विकास कार्यों को राजनीतिक गति देने के लिए सरकार इस पद पर किसी राजनीतिक चेहरे को बिठाने के मूड में है। इसी को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक गलियारों में दावेदारों की लॉबिंग काफी तेज हो चुकी है। जयपुर से लेकर दिल्ली तक जोर-आजमाइश चल रही है। इस रेस में नगर निगम के मेयर पद से चूके वरिष्ठ नेताओं, नवनियुक्त पार्षदों और पूर्व अध्यक्षों के नाम प्रमुखता से तैर रहे हैं। वहीं, भजनलाल सरकार पार्टी में अंदरूनी गुटों में खींचतान से बचने के लिए संघ (आरएसएस) पृष्ठभूमि के किसी निष्ठावान व जमीनी चेहरे को जिम्मेदारी सौंपने कर चौंका भी सकती है। दावेदारों ने अपनी जोड़-तोड़ शुरू कर दी है। दिसंबर में ताजपोशी के संकेत, दावेदार सक्रिय पंचायतीराज चुनावों की प्रक्रिया खत्म होते ही दिसंबर तक यूडीए चेयरमैन पद पर नियुक्ति होने की संभावना से दावेदारों की धड़कनें बढ़ गई हैं। रेस में प्रमुख रूप से भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद सामर, पूर्व शहर उपाध्यक्ष अतुल चंडालिया और यूआईटी के पूर्व चेयरमैन रविंद्र श्रीमाली, शहर भाजपा महामंत्री व भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के संबंधी पंकज बोराणा का नाम चर्चा में है। महिलाओं में शोभागपुरा की पूर्व सरपंच, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष व नवनियुक्त पार्षद डॉ. कविता जोशी के साथ-साथ नवनियुक्त पार्षद आकाश वागरेचा सहित अन्य युवा नेता भी अपनी-अपनी दावेदारी को मजबूत करने में जुटे हैं। संघ के सरप्राइज कार्ड पर टिकी नजरें, गुटबाजी पर कड़ा संदेश भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अक्सर बड़े और मलाईदार पदों पर आपसी गुटबाजी को रोकने के लिए डार्क हॉर्स का इस्तेमाल करता रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यदि वरिष्ठ नेताओं के बीच सहमति नहीं बनती है, तो सरकार संघ (आरएसएस) विचारधारा से जुड़े किसी समर्पित चेहरे पर मुहर लगाई जा सकती है। निकाय-पंचायतीराज चुनावों से ठीक बाद संघनिष्ठ कार्यकर्ता को चेयरमैन बनाने से संघ के समर्पित कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश जाएगा। यही वजह है कि खुलकर लॉबिंग कर रहे दिग्गज नेताओं की नजरें शीर्ष नेतृत्व के संभावित सरप्राइज पर भी टिकी हुई हैं।