14 अक्टूबर 2026, सुबह 9 बजकर 10 मिनट। फ्रैंकफर्ट (जर्मनी) से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2030 के कॉकपिट से एक सिग्नल भेजा गया- ‘स्क्वाक 7500’....ये सिग्नल विमान हाईजैक जैसे बड़े खतरे का संकेत था। आनन-फानन में सुबह 9:45 बजे जयपुर एयरपोर्ट पर विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) और सुरक्षा एजेंसियों ने जांच की। लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। आखिर कॉकपिट में ऐसा क्या हुआ था? 'स्क्वाक 7500' कोड क्या होता है, जिसके इस्तेमाल हाल ही में कैप्टन स्मित मच्छर ने भी किया था? आखिर फ्लाइट को दिल्ली की बजाय जयपुर में क्यों लैंड कराया गया? यही जानेंगे आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में… सवाल-1: सुबह 9 बजे कॉकपिट में आखिर हुआ क्या था? जवाब: फ्लाइट AI-2030 ने 13 अक्टूबर की रात 9:45 बजे फ्रैंकफर्ट से उड़ान भरी थी। इस फ्लाइट का संचालन एयर इंडिया की ओर से किया जा रहा था, जो कि मर्जर से पूर्व में विस्तारा का विमान था। विमान को 14 अक्टूबर की सुबह 10:40 बजे दिल्ली पहुंचना था। सब कुछ सामान्य चल रहा था। सवाल-2: लैंडिंग के बाद फ्लाइट में क्या मिला? जवाब: जयपुर में लैंडिंग के बाद CISF और ATS सहित सभी सुरक्षा एजेंसियों ने एयरक्राफ्ट की पूरी तलाशी ली। एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक, एयरक्राफ्ट में किसी तरह की कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। फ्लाइट में यात्रा कर रहे करीब 300 पैसेंजर्स को फ्लाइट से नीचे उतारकर शिफ्ट किया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने फ्लाइट के पायलट से पूछताछ की कि आखिर- 7500 बटन कैसे दबा? सूत्रों के अनुसार, तकनीकी खामी की वजह से इस अलार्म कोड के जरिए मैसेज होने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया है। सवाल-3: ये 7500 कोड आखिर होता क्या है, जिसे हाईजैक कोड कहा जाता है? जवाब: उड़ते विमान में हर खतरे के लिए अलग ट्रांसपोंडर कोड होता है, जिन्हें स्क्वाक कोड कहते हैं। 7500: गैरकानूनी दखल, यानी हाईजैक जैसी स्थिति 7600: रेडियो फेल्योर यानी कम्युनिकेशन नहीं होने पर 7700: जनरल इमरजेंसी का संकेत जब पायलट कॉकपिट में इनमें से कोई भी नंबर सेट करता है तो उसके सिग्नल तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को मिलते हैं। इन नंबरों को कई बार ये मैनुअली डाला जाता है, कई बार एक बटन दबाकर। पायलट स्क्वाक कोड 7500 सेट करता है, तो ATC के रडार पर फ्लाइट की पट्टी लाल हो जाती है, इससे हाईजैक का अलार्म बज जाता है। 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कैप्टन स्मित मच्छर ने भी पहले 7700 और फिर 7500 कोड भेजा था, जो कॉकपिट में हुई मारपीट के बाद था। कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि कई बार टेक्निकल ग्लिच या फिर ट्रांसपोंडर में शॉर्ट सर्किट या पायलट की उंगली गलत बटन पर लगने से भी ये कोड चला जाता है। लेकिन फिर भी प्रोटोकॉल यही कहता है कि इसे असली संकेत ही माना जाए, जब तक की पूरी जांच न हो जाए। सवाल-4: दिल्ली की बजाय जयपुर में ही फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग क्यों कराई गई? जवाब: इस फैसले को समझने के लिए विमान की सुरक्षा और इमरजेंसी में एयरपोर्ट चुनने की प्रक्रिया को जानना होगा। मौटे तौर पर इसके 3 संभावित कारण नजर आते हैं। 1. विमान को सुरक्षित उतारना प्राथमिकता थी 7500 कोड मिलने के बाद विमान में हाईजैक यानी गैरकानूनी दखल की आशंका को गंभीरता से लेना जरूरी था। ऐसे हालात में ATC और सुरक्षा एजेंसियां विमान को सुरक्षित उतारने की व्यवस्था करती हैं। 2. जयपुर में आइसोलेशन बे की सुविधा प्रोटोकॉल नियमों के अनुसार किसी भी तरह की इमरजेंसी लैंडिंग होने पर विमान को आइसोलेशन बे में ले जाया जाता है। यह एयरपोर्ट का वो अलग हिस्सा होता है, जहां पर विमान को खड़ा करके यात्रियों को सुरक्षित जगह पहुंचाया जा सके और विमान की सुरक्षा जांच की जा सके। आइसोलेशन बे होने से एयरपोर्ट पर बाकी फ्लाइट के संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। 3. जयपुर एयरपोर्ट सबसे नजदीक किसी भी इमरजेंसी में सबसे नजदीकी एयरपोर्ट, सुरक्षा क्लीयरेंस जैसी चीजों अहम होती हैं। विमान में उस वक्त 293 यात्री और 13 क्रू मेंबर्स सवार थे और फ्लाइट को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने में 1.30 घंटा बाकी था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐसे में फ्लाइट को दिल्ली की बजाय जयपुर एयरपोर्ट पर उतारने का फैसला हुआ। अलार्म बजने के 35 मिनट बाद ही फ्लाइट जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड हुई। विमान को सुरक्षित उतारकर जांच की गई। सवाल-5: क्या सिस्टम की गलती से भी ऐसे हाईजैक अलर्ट बजना आम है और स्मित मच्छर केस से इसका क्या कनेक्शन है? जवाब: हां, एविएशन में इसे 'Inadvertent Squawk' कहा जाता है। एविएशन सेफ्टी रिपोर्टिंग सिस्टम के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल 10-12 बार पायलट गलती से 7500 कोड ट्रांसमिट कर देते हैं। कई बार पुराने ट्रांसपोंडर में 7500, 7600 और 7700 कोड एक-दूसरे के बहुत पास होते हैं, तो टर्बुलेंस या जल्दबाजी में गलत कोड भी लग जाता है। इसी वजह से अहमदाबाद ATC को सिर्फ कुछ सेकेंड का ही सिग्नल मिला और फिर वो गायब हो गया। अगर सच में हाईजैक होता तो पायलट लगातार इस कोड को बनाए रखता है। इसका कनेक्शन कैप्टन स्मित मच्छर वाले केस से इसलिए जोड़ा जा रहा है क्योंकि दोनों में 7500 कोड कॉमन है। 30 सितंबर को फ्लाईदुबई फ्लाइट FZ1073 में को-पायलट ने प्लेन को क्रैश करने की कोशिश की थी। तब असली इमरजेंसी में 7700 और फिर 7500 कोड भेजा गया था। यात्रियों ने खून से लथपथ स्मित को बचाया। उस घटना के बाद DGCA और BCAS ने सभी एयरलाइंस के लिए ट्रांसपोंडर अलर्ट को लेकर एडवाइजरी जारी की थी कि किसी भी 7500 कोड को 100% असली मानकर ही एक्शन लिया जाए, भले ही बाद में वो फॉल्स निकले। AI-2030 के केस में भी इसी प्रोटोकॉल का पालन हुआ। जयपुर में लैंडिंग और सुरक्षा जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय हो पाया कि ये फॉल्स अलार्म था। हालांकि इसके वास्तविक कारणों पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। …. ये खबर भी पढ़ें… एअर इंडिया फ्लाइट से मिला हाईजैक अलर्ट, पायलट का इनकार:जर्मनी-दिल्ली फ्लाइट की जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग; कैप्टन स्मित मच्छर ने भी ऐसा मैसेज भेजा था