पार्श्वगायक मुकेश की पुण्यतिथि पर झालावाड़ में संगीत और प्रकृति संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। आलाप संगीत संस्थान की ओर से आयोजित ‘प्रकृति के रंग, मुकेश के गीतों के संग’ कार्यक्रम में कलाकारों ने मुकेश के सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियों से संगीत प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम के बाद वन विहार और पौधरोपण कर लगाए गए पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प भी लिया गया। मुकेश के चित्र पर माल्यार्पण से शुरुआत कार्यक्रम का शुभारंभ पार्श्वगायक मुकेश के चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। इसके बाद कलाकारों ने एक के बाद एक मुकेश के लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। गीतों की प्रस्तुतियों से कार्यक्रम स्थल का वातावरण संगीतमय हो गया और संगीत प्रेमी सदाबहार नगमों की धुनों में खो गए। कलाकारों ने सुनाए मुकेश के लोकप्रिय नगमे कोमल टेलर ने ‘चल री सजनी अब क्या सोचे’, भारती टेलर ने ‘मेरी तमन्नाओं की तकदीर तुम संवार दो’, खुशी कानुडे ने ‘कई बार यूं ही देखा है’, उज्ज्वला कानुडे ने ‘धीरे-धीरे बोल कोई सुन न ले’ और रूपेश सोनी ने ‘मैं पल दो पल का शायर हूं’ प्रस्तुत किया। नरेंद्र कुमार दुबे ने ‘जाने कहां गए वो दिन’, पुष्पलता दुबे ने ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’, एसीएफ संजू शर्मा ने ‘कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे’, डॉ. प्रीति शर्मा ने ‘एक दिन बिक जाएगा’ और डॉ. गिरीश शर्मा ने ‘कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है’ गीत सुनाए। इसी क्रम में प्रीति गौतम ने ‘सुहाना सफर और ये मौसम हंसी’, हरिश्चंद्र शर्मा ने ‘जो तुमको हो पसंद’, हरीश सोनी एवं स्वाति सोनी ने युगल गीत ‘क्या खूब लगती हो’ और अनिल कंजोलिया एवं सुनीता कंजोलिया ने ‘एक प्यार का नगमा है’ प्रस्तुत किया। संजीव गौतम ने ‘डम डम डिगा डिगा’, अशोक जांगिड़ ने ‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार’ और अनाहिता शर्मा ने ‘ये कौन चित्रकार है’ गीत प्रस्तुत कर समां बांध दिया। मुकेश के जीवन और संगीत सफर के किस्से कार्यक्रम के दौरान रितु सोनी ने मुकेश के जीवन और संगीत सफर पर प्रकाश डालते हुए उनसे जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग साझा किए। आकाशवाणी कार्यक्रम अधिकारी विमल शास्त्री ने भी मुकेश से जुड़े संस्मरण और रोचक प्रसंग सुनाए। ऐश्वर्या वर्मा ने मुकेश के गीतों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। सुरों के बाद प्रकृति के नाम किया समय कार्यक्रम को केवल संगीत तक सीमित न रखते हुए प्रकृति संरक्षण से भी जोड़ा गया। संस्कार भारती और आलाप संगीत संस्थान के सदस्यों ने वन विहार किया। इसके बाद लवकुश वाटिका, बड़बेला में पौधरोपण कर लगाए गए पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया गया। इस पहल के जरिए आयोजन में मुकेश के अमर गीतों के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया। डॉ. प्रीति शर्मा और पुष्पलता दुबे ने किया संचालन कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीति शर्मा और पुष्पलता दुबे ने किया। सदाबहार गीतों, मुकेश से जुड़े संस्मरणों और पौधरोपण की पहल ने आयोजन को संगीत, स्मृति और प्रकृति संरक्षण का यादगार संगम बना दिया।