राजस्थान में शायद ही ऐसा कोई जिला होगा जहां पहले सत्ताधारी पार्टी की चेयरमैन को और फिर उनकी ही पार्टी के पार्षद व पूर्व नेता प्रतिपक्ष को रिश्वत के मामले में जेल जाना पड़ा हो। लेकिन अलवर में 2021 में पहले नगर परिषद की सभापति बीना गुप्ता को रिश्वत के मामले में ट्रैप किया गया। जिससे उनकी चेयरमैन की कुर्सी छिन गई। उनकी जगह विपक्षी पार्टी के उप सभापति को सभापति बनाना पड़ा, लेकिन कुछ महीनों के बाद ही सत्ताधारी पार्टी के पूर्व नेता प्रतिपक्ष व पार्षद नरेंद्र मीणा को भी रिश्वत में मामले में जेल भेज दिया गया। अब 7 साल बाद वापस अलवर नगर निगम में मेयर के चुनाव हो रहे हैं। फिर से कांग्रेस के बड़े नेता मेयर की कुर्सी पाने के लिए अच्छे प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाने, रणनीति बनाने में लगे हैं। ताकि पार्षद के चुनाव परिणाम के बाद जोड़-तोड़ करने की नौबत आती है तो मजबूती से लड़ाई लड़ी जा सके। जिनमें प्रमुख रूप से एमएस ज्वेलर्स के दीपक गर्ग , कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष योगेश मिश्रा, ब्लॉक अध्यक्ष रमन सैनी व पूर्व पार्षद अजय मेठी के परिवार से महिला को पहले पार्षद का चुनाव लड़ाना तय माना जा रहा है। पिछले चुनाव को देखिए…कैसे बनी कांग्रेस की सभापति, फिर जेल साल 2019 में हुए नगर परिषद अलवर के चुनाव में कांग्रेस के 19 पार्षद जीतकर आए थे। जबकि बीजेपी के 27 जीते थे। निर्दलीय 19 जीते थे। फिर भी कांग्रेस ने जोड़ तोड़ कर 9 वोट से बीना गुप्ता को सभापति बना दिया था। लेकिन करीब 2 साल के बाद ही बीना गुप्ता 80 हजार रुपए की रिश्वत के मामले में उसको खुद के घर से पुलिस ने अरेस्ट कर जेल भेज दिया था। करीब 1 महीने के बाद बीना गुप्ता की जमानत हुई थी। जबकि उसके बेटे की जमानत बाद में हुई थी। फिर सभापति को कांग्रेस सरकार ने ही बर्खास्त कर दिया था। 17 फरवरी 2022 को नरेंद्र मीणा गिरफ्तार हुए, पिछले कार्यकाल में नेता प्रतिपक्ष थे अलवर नगर परिषद के कांग्रेस पार्षद नरेंद्र मीणा को फरवरी 2022 में एसीबी (भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो) ने 5 लाख रुपये की रिश्वत के मामले में पकड़ा था। एसीबी ने अलवर में 15 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के टेंडर में कमीशन लेने के मामले में कार्रवाई की थी। एसीबी ने पार्षद नरेंद्र मीणा के घर से करीब 5 लाख रुपए भी बरामद किए थे। जबकि पिछले कार्यकाल में कांग्रेस नेता नरेंद्र मीणा नगर परिषद अलवर में नेता प्रतिपक्ष रहे थे। दुबारा पार्षद बनकर आए थे। इस तरह लगातार कांग्रेस के बड़े नेता ट्रैप हो गए। जबकि पार्षद नरेंद्र मीणा और वर्तमान में राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली एक ही सोसायटी में आसपास के फ्लैट में रह रहे थे। उस समय जूली कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। इसके बावजूद भी दो नेता उनके ट्रैप हो गए थे। हालांकि काफी लोग इसे गहलोत सरकार की पारदर्शिता मानते हैं। अब वापस कांग्रेस मेयर बनाना चाह रही, जूली के पास रहेगा जिम्मा अब वापस अलवर शहर में कांग्रेस अपना मेयर बनाने के जुगाड़ में है। वैसे भी पिछले नगर परिषद के चुनाव में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की बड़ी भूमिका थी। इस बार कांग्रेस का मेयर बनने की नौबत रही तो इनके हाथ में कमान रहेगी। पूर्व सभापति बीना गुप्ता ने वापस चुनाव लड़ने के लिए बायोडाटा दिया है। लेकिन नगर परिषद में नेता प्रतिपक्ष रह चुके नरेंद्र मीणा ने चुनाव लड़ने के लिए पार्टी को बायोडाटा नहीं दिया है। अब वापस जोड़तोड़ करना पड़ा तो पार्टी ने तीन-चार चेहरे तैयार किए हैं। जिनको चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। ज्वैलर्स दीपक गर्ग राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बहुत अधिक खास बताए जाते हैं।