अलवर नगर निगम की पहली मेयर की कुर्सी के लिए वोटिंग का दिन अब दूर नहीं है। एक दिन बाद यानी सोमवार सुबह 10 बजे से वोटिंग शुरू होगी। 2 बजे तक वोट डालने का समय है। उसके कुछ देर बाद पता चल जाएगा कि अलवर की पहली मेयर कौन बनेंगी। बीजेपी से वार्ड 7 की पार्षद सुमनलता अग्रवाल और कांग्रेस से वार्ड 39 की पार्षद कमलेश शर्मा के बीच सीधा मुकाबला है। बीजेपी की मेयर बनने के अवसर अधिक हैं। जिसका कारण है कि उनके पार्षद ज्यादा जीते हैं। दूसरा प्रदेश में बीजेपी की सरकार है और निर्दलीय पार्षद सरकार के साथ जाने का जल्दी तैयार हो जाते हैं। वहीं कांग्रेस के नेताओं को उनके प्रत्याशी के जीतने की पूरी उम्मीद है। का कहना है कि 2019 के नगर परिषद सभापति के चुनाव में कांग्रेस के 19 पार्षद जीते थे। इस बार 23 जीते हैं। इसलिए उनका मेयर बनना संभव है। पहले 19 निर्दलीय जीते थे। इस बार 13 ही निर्दलीय जीते हैं। 700 KM दूर से आएंगे बीजेपी पार्षद नगर निगम चुनाव में 65 नवनिर्वाचित पार्षद हैं। जिनमें से 28 बीजेपी के हैं। कुछ निर्दलीय भी बीजेपी की बाड़ेबंदी में बताए जा रहे हैं। ये अधिकतर पार्षद अलवर से करीब 700 किलोमीटर दूर हैं। अब इनको 20 अगस्त को दिल्ली के आसपास लेकर आया जाएगा। वहां से 21 सितंबर को सीधे अलवर नगर निगम कार्यालय लेकर आएंगे। जहां वोटिंग होगी। दो बसों में पार्षद आएंगे। पूरी घेराबंदी कर एक-एक से वोट कराया जाएगा। वोटिंग के लिएए आते समय काफी कुछ तस्वीर साफ हो जाएगी। कांग्रेस के पार्षद 100 किलोमीटर दूर से आएंगे कांग्रेस के 23 पार्षद अलवर से करीब 100 किलोमीटर दूर जयपुर के आसपास रिसोर्ट में हैं। वे 21 सितंबर को सीधे जयपुर से अलवर आ सकेंगे। सुबह 8 बजे भी वहां से चलेंगे तो यहां 11 बजे तक आसानी से पहुंच जाएंगे। पहले पार्षदों को पद की शपथ दिलाई जाएगी। उनको सर्टिफिकेट मिलेगा। उसके बाद एक-एक से वोट डलवाए जाएंगे। वोट डालने के बाद पार्षद वापस उसी तरह बसों में बैठकर निकल जाएंगे। उनके साथ पार्टी के कार्यकर्ता रहेंगे। जिनकी पूरी निगरानी चुनाव परिणाम आने के बाद से लगातार जारी है। रिंकल गर्ग ने चौकाया - पार्षद मोटा पैसा मांग रहे मेयर चुनाव के लिए निर्दलीय नामांकन भरने वाली रिंकल गर्ग ने नामांन वापस लेने के बाद यह कहकर चौकाया था कि पार्षदों की हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। इतना मोटा पैसा देना उनके बस की बात नहीं है। जिस तरह से खरीद फरोख्त हो रही है। उसके हिसाब से कांग्रेस का काबू भी नहीं लग पाएगा। हालांकि कांग्रेस के बड़े नेताओं का कहना है कि कुछ निर्दलीय खुद अपनी इच्छा से कांग्रेस प्रत्याशी को वोट करना चाहते हैं। इसलिए खुद उनके पास आए हैं।