चित्तौड़गढ़ में इस बार का दशहरा सिर्फ रावण दहन के लिए नहीं, बल्कि बारिश के बाद पैदा हुई चुनौती के बीच पूरे आयोजन को सफल बनाने के लिए भी याद रखा जाएगा। मंगलवार शाम हुई बारिश ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के तीनों पुतलों को पूरी तरह भिगो दिया था। ऐसे में तय समय पर रिमोट से दहन की तैयारी तो शुरू हुई, लेकिन पुतलों ने तुरंत आग नहीं पकड़ी। आयोजकों को कई मिनट तक लगातार आतिशबाजी करनी पड़ी, तब जाकर एक-एक कर तीनों पुतले जले। इस दौरान मैदान में मौजूद हजारों लोग पूरे घटनाक्रम को देखते रहे। हर बार जब पुतले में आग नहीं लगती तो लोगों की नजरें आयोजकों की तरफ चली जातीं, लेकिन जैसे ही आग पकड़ती, पूरा मैदान जय श्रीराम के नारों और तालियों से गूंज उठता। बारिश से आई इस परेशानी के बावजूद आयोजन बिना किसी बाधा के पूरा हुआ और लोगों का उत्साह आखिर तक बना रहा। रिमोट दबा, लेकिन आग लगाने में करनी पड़ी अलग मशक्कत इस बार आयोजन का मुख्य आकर्षण रिमोट कंट्रोल से रावण दहन रखा गया था। संत विनोद यति जी महाराज और दिग्विजय राम जी महाराज के सानिध्य में रिमोट का बटन दबाकर दहन की शुरुआत की गई, लेकिन बारिश के कारण भीगे पुतलों ने आयोजकों की तैयारी को चुनौती दे दी। सबसे पहले रात 8:24 बजे 51 फीट ऊंचे मेघनाथ के पुतले का रिमोट दबाया गया। रिमोट से आतिशबाजी शुरू हुई, लेकिन पुतला नहीं जला। इसके बाद करीब तीन मिनट तक लगातार पटाखों की मदद से आग लगाने की कोशिश की गई। आखिरकार रात 8:27 बजे मेघनाथ के पुतले में आग लगी और वह चार मिनट तक जलते हुए 8:31 बजे पूरी तरह राख हो गया। इसके बाद 51 फीट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतले का रिमोट 8:31 बजे दबाया गया। इसमें भी तुरंत आग नहीं लगी। करीब दो मिनट तक अतिरिक्त आतिशबाजी करनी पड़ी, जिसके बाद 8:33 बजे पुतला जलना शुरू हुआ और एक मिनट में 8:34 बजे तक पूरी तरह जल गया। 71 फीट के रावण ने सबसे ज्यादा बढ़ाया इंतजार सबसे आखिर में 71 फीट ऊंचे रावण के पुतले का नंबर आया। रात 8:36 बजे जैसे ही रिमोट दबाया गया, उसके मुंह से आतिशबाजी तो शुरू हो गई, लेकिन शरीर में आग नहीं लगी। इससे कुछ देर के लिए लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई। आयोजकों ने हार नहीं मानी और करीब पांच मिनट तक लगातार अतिरिक्त आतिशबाजी कर पुतले को आग लगाने की कोशिश करते रहे। आखिरकार रात 8:41 बजे रावण के पुतले ने आग पकड़ ली। इसके बाद देखते ही देखते आग तेजी से फैल गई और दो मिनट में रात 8:43 बजे तक पूरा पुतला जलकर राख हो गया। बारिश की वजह से दहन में हुई यह देरी इस बार के दशहरा आयोजन की सबसे अलग तस्वीर बन गई। हालांकि मैदान में मौजूद लोगों ने पूरे धैर्य के साथ इंतजार किया और जैसे ही रावण जला, पूरा वातावरण जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। रामलीला के मंचन ने बांधे रखा दर्शकों का ध्यान रावण दहन से पहले जय शिव रामायण मंडल के कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया। इस बार रामलीला को पहले की तुलना में थोड़ा आधुनिक अंदाज में पेश किया गया। मंच पर कलाकारों ने भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता, हनुमान और रावण सहित सभी प्रमुख पात्रों का अभिनय किया। एक कलाकार जोकर के रूप में मंच पर आया, जिसने अपनी प्रस्तुति से बच्चों और बड़ों को खूब हंसाया। भगवान बजरंगबली का भगवान राम और लक्ष्मण को अपने कंधों पर उठाकर मंच पर लाना भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। मंचन के दौरान भगवान राम और रावण के बीच युद्ध का दृश्य दिखाया गया। अंत में भगवान राम ने रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया। जैसे ही रामलीला समाप्त हुई, आतिशबाजी शुरू हुई और इसके बाद रावण दहन का कार्यक्रम आगे बढ़ा। रंग-बिरंगी आतिशबाजी और बड़ी संख्या में पहुंचे लोग दशहरा मैदान में शाम से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। परिवारों के साथ बड़ी संख्या में बच्चे भी आयोजन देखने पहुंचे। रावण दहन से पहले और बाद में हुई रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने पूरे आसमान को रोशनी से भर दिया। अलग-अलग रंगों की आतिशबाजी के बीच लोगों ने अपने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो भी रिकॉर्ड किए। बारिश के बावजूद लोगों की संख्या में कोई खास कमी नहीं दिखी। आयोजन के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस का पर्याप्त जाब्ता भी तैनात रहा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। जनप्रतिनिधि, अधिकारी और संत भी रहे मौजूद दशहरा आयोजन में संत विनोद यति जी महाराज और दिग्विजय राम जी महाराज का आशीर्वाद मिला। कार्यक्रम में एसडीएम दिलीप सिंह, एडिशनल एसपी गजेंद्र सिंह जोधा, डीएसपी शहर बृजेश सिंह, भाजपा महामंत्री हर्षवर्धन सिंह रूद, नगर परिषद सभापति अनिल ईनाणी, उपसभापति सुदर्शन रामपुरिया, शहर मंडल अध्यक्ष गौरव त्यागी, उपाध्यक्ष राजन माली, कोतवाली थानाधिकारी रजनीश कुमार, सदर थानाधिकारी प्रेम सिंह सहित पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और भीड़ को व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित किया गया। बारिश से आई चुनौती के बावजूद दशहरा समारोह तय कार्यक्रम के अनुसार पूरा हुआ और लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पर्व को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया।