सकतपुर| कस्बे सहित आसपास के कई गांवों की प्राचीन बावड़ियां देखरेख के अभाव में अस्तित्व खोती जा रही हैं। कस्बे और खानपुरिया गांव में प्राचीन समय में राजा-महाराजाओं ने बावड़ियों का निर्माण कराया था। बुजुर्गों के अनुसार इन बावड़ियों की पूरे तहसील क्षेत्र में अलग पहचान थी। यहीं से पूरा गांव पीने का पानी भरता था। मवेशियों के लिए खेळ भी भरी जाती थी। जलस्तर गहराने से बावड़ियां सूखने लगी हैं। ग्रामीण पंकज शर्मा, रघु बेरागी, महेंद्र पोटर सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि दो दशक पहले कस्बे सहित खानपुरिया, शेरगढ़, रिछंदा, धूमेन आदि गांवों के कुओं और बावड़ियों में पूरे साल पर्याप्त पानी रहता था। अब सार-संभाल नहीं होने से बावड़ियों का अस्तित्व खत्म हो रहा है। कस्बे में स्थित गणेश कुंड भी जर्जर हालत में पहुंच गया है। कुंड और बावड़ी में मुंडेर नहीं है। कई बार मवेशी गिर जाते हैं। ग्रामीणों ने राज्य सरकार से इनका जीर्णोद्धार कराने की मांग की है।