पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए उन पर तल्ख कमेंट किए हैं। गहलोत ने कहा- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद पूरा देश ज्ञानेश कुमार से पूछ रहा है कि अब कोई शर्म बची हुई है आपकी? गहलोत जयपुर के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। गहलोत ने कहा- निर्वाचन विभाग के सदस्यों ने आपसी बैठक करके और तीनों सदस्यों को साथ बैठाकर प्रेस नोट जारी करने और सफाई देने का प्रयास किया। उसमें दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने हमारे फैसले को बरकरार रखा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि उन्होंने न तो कोई फैसला बरकरार रखा है और न ही इस पर कोई टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बाद अब क्या बच जाता है? गहलोत ने कहा- अब बच गया है उनका इस्तीफा होना। तुरंत होना चाहिए ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा गहलोत ने कहा- यदि तत्कालीन उपराष्ट्रपति का अचानक 'स्वास्थ्य कारणों' से इस्तीफा कराया जा सकता है, जिसके पीछे का सच क्या था, यह तो वे ही जानते होंगे। लोगों को भी उस पर संदेह था तो ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से क्यों नहीं कराया जा सकता? कम से कम एक चैप्टर क्लोज तो हो। पक्ष-विपक्ष अपनी भूमिका अदा करना शुरू करे। 19 दिन तक हाउस के अंदर प्राइम मिनिस्टर और अमित शाह नहीं आए, यह एक बड़ा इश्यू था। इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा होना चाहिए। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल गहलोत ने कहा- एक दौर था, जब भारतीय निर्वाचन आयोग की साख न केवल देश में, बल्कि पूरी दुनिया में स्थापित थी। दुनिया के कई देशों में जब चुनाव होते थे, तो भारतीय निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन और सहयोग लिया जाता था। दुर्भाग्य से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आने के बाद जिस प्रकार मिलीभगत से फैसले लिए गए, उसने आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक-एक कर ज्ञानेश के झूठ पकड़े जा रहे अशोक गहलोत ने कहा- राहुल गांधी ने बहुत पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वोटों की चोरी हो रही है और SIR गलत हो रहा है, लेकिन तब किसी ने ध्यान नहीं दिया। यह तमाशा देश पिछले लगभग एक साल से देख रहा है। गहलोत ने कहा- अब एक-एक कर ज्ञानेश कुमार के झूठ पकड़े जा रहे हैं। हाल ही में जब यह खुलासा हुआ तो पूरा देश स्तब्ध रह गया। आयोग के ही 2 सदस्य आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई और उन्हें कैबिनेट सचिव को लेटर लिखना पड़ा। गहलोत ने कहा- हालांकि उन्हें राष्ट्रपति को पत्र लिखना चाहिए था, लेकिन देश की शीर्ष निर्वाचन संस्था की यह नौबत आ जाना बेहद चिंताजनक है। आज पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और सभी राजनीतिक दल सड़कों पर हैं। पूरे देश में इस स्थिति को लेकर आक्रोश है। हमारी चुनाव प्रणाली और लोकतंत्र पर संकट अशोक गहलोत ने कहा- हमारी चुनाव प्रणाली और लोकतंत्र पर बने इस संकट से दुनियाभर में भारत का क्या संदेश जा रहा है? जो देश कभी भारत से प्रेरणा लेते थे कि दुनिया में लोकतंत्र के संदेश को फैलाया और मजबूत किया है। आज वही देख रहे हैं कि यहां चुनाव आयोग खुद SIR के नाम पर 12-13 करोड़ मतदाताओं के नाम काट रहा है। गहलोत ने कहा- हाल ही सुप्रीम कोर्ट के एक जज साहब की यह टिप्पणी भी आई कि "अगली बार वोट दे देंगे।" मैं इसे बहुत खतरनाक संदर्भ मानता हूं। हो सकता है कि जज साहब ने यह बात किस परिप्रेक्ष्य में कही हो, लेकिन जनता में संदेश गलत गया कि जो मतदाता इस बार वोट देने से वंचित रह गए। वे अगली बार दे दें, यह तर्कसंगत नहीं है।
यह खबर भी पढ़ें... गहलोत बोले- बीजेपी ने बेईमानी-बेशर्मी की हदें पार की:अफसर-पुलिसवाले भी पाप में शामिल हो गए; डोटासरा ने कहा-ये प्रदेश के इतिहास में काला अध्याय पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर निकाय चुनाव में बेईमानी करने और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए। गहलोत ने पक्षपात करने वाले अफसरों को चेतावनी दी है। (पूरी खबर पढ़ें)