बज्जू क्रय-विक्रय सहकारी समिति की 23वीं सालाना आम सभा शनिवार को हुई। इसकी अध्यक्षता समिति अध्यक्ष एडवोकेट खींवसिंह भाटी ने की। बैठक में समिति का सालाना लेखा-जोखा पेश किया गया और अगले साल की कार्ययोजना व अलग-अलग प्रस्तावों पर बात हुई। अध्यक्ष भाटी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में समिति ने 21227.79 लाख यानी करीब 212.28 करोड़ रुपए का कारोबार किया। इस दौरान समिति को 155.25 लाख रुपए का कुल लाभ और 114.53 लाख रुपए यानी करीब 1.15 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ। समिति को इस साल नैफेड की सदस्यता मिली है, जिसे एक बड़ी उपलब्धि बताया गया। समिति की स्थापना 1990 में हुई थी। अध्यक्ष ने कहा कि इससे कृषि उपज की खरीद और मार्केटिंग के मौके बढ़ेंगे, जिसका फायदा सदस्यों और इलाके के आम किसानों को मिलेगा। बैठक में 2019-20 की मूंगफली खरीद से जुड़ा राजफेड का मामला भी उठा। अध्यक्ष ने बताया कि राजफेड के पत्र के मुताबिक, तय समय के बाद मूंगफली स्टॉक जमा होने की वजह से बज्जू समिति पर 2,33,88,320.08 रुपए की कटौती की गई है। जबकि इस मामले में समिति की तरफ से कोई कमी नहीं थी। उन्होंने कहा कि समिति ने नियमानुसार और खरीद के हिसाब से माल पहले से तय वेयरहाउस में जमा करा दिया था। इसके बावजूद पूरी जिम्मेदारी समिति पर डाली जा रही है। इस मामले में समिति कानूनी रास्ते खोज रही है। कृषि विभाग की योजनाओं के तहत बीज और उपचार किट बांटना समिति के जरिए शुरू होने से कारोबार और कमाई बढ़ी है। अगले साल के लिए 213.55 लाख रुपए का बजट तय किया गया है, जिसमें 97.05 लाख रुपए का लाभ होने का अनुमान है। साथ ही समिति के व्यवस्थापक दिलीपसिंह को रिटायरमेंट के बाद संविदा पर रखने का प्रस्ताव भी पास हुआ। बैठक में किसानों और सदस्यों ने नकली खाद और जबरन कीटनाशक बेचने से बचाव के लिए उर्वरक खाद केवीएसएस के जरिए बांटने की मांग की। मुख्य व्यवस्थापक दीपेंद्र सिंह नाथावत ने भी समिति की उपलब्धियों के बारे में बताया। बैठक में उप रजिस्ट्रार उर्मिला पुनिया, व्यवस्थापक दलीप सिंह राठौड़, गणपतराम खीचड़, कानाराम धायल, मांगीलाल नाई, धनपत राय बाफना, मालूराम नैण और अनिल बेनीवाल समेत समिति के सदस्य मौजूद रहे।