बाड़मेर कोर्ट परिसर में शनिवार को स्थानीय वकील की बिना NOC के बाहर से आए वकील द्वारा पैरवी करने को लेकर 2 पक्षों में कहासुनी हो गई। सूचना पर बार संघ अध्यक्ष के साथ पुलिस और RAC का जाब्ता मौके पर पहुंचा। बाद में दोनों पक्षों से बातचीत कर मामला शांत करवाया गया। जानकारी के अनुसार बाड़मेर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में नागाणा थाना क्षेत्र में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में एडवोकेट पवन गिरी पैरवी कर रहे थे। मामले में आरोपी अजय कुमार दुबे के कोर्ट में पेश नहीं होने पर उसकी जमानत जब्त हो गई थी और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था। शनिवार को आरोपी जयपुर से वकील बीरबल विश्नोई को लेकर आया और कोर्ट में उसकी जमानत अर्जी पेश की गई। स्थानीय वकील को बिना NOC के बाहर से आए वकील द्वारा जमानत लगाने की जानकारी मिली तो वकीलों ने इसका विरोध किया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ता देख पुलिस और RAC का जाब्ता कोर्ट परिसर पहुंचा। मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और बाड़मेर जिला अधिवक्ता संघ ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों पक्षों से समझाइश की। बातचीत के बाद मामला शांत हुआ। NOC के बिना बाहर का वकील पैरवी नहीं कर सकता बाड़मेर जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष विष्णु भगवान चौधरी ने बताया कि एडवोकेट एक्ट के तहत बाहर से आने वाला कोई भी वकील, स्थानीय वकील की NOC के बिना पैरवी नहीं कर सकता। इसी बात को लेकर विवाद हुआ था। बाद में दोनों पक्षों के बीच बातचीत कर मामले को शांत करवा दिया गया।