भीलवाड़ा में 84.40 किलो अफीम तस्करी के करीब 6 साल पुराने मामले में NDPS कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषी मानते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीनों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। 2020 में पुलिस ने चांदघर जंगल में लावारिस छोड़ी गई मारुति वैन से अफीम बरामद की थी। मामले में अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान और 121 दस्तावेज पेश किए, जिनके आधार पर कोर्ट ने ईश्वर वैष्णव, श्यामलाल बलाई और मनोहर लाल धाकड़ को दोषी ठहराया। पुलिस की गाड़ी देखकर वैन छोड़कर भागा विशिष्ट लोक अभियोजक रामस्वरूप गुर्जर ने बताया - 11 जून 2020 को अवैध बजरी की रोकथाम के लिए पुलिस टीम गश्त कर रही थी। इस दौरान चांदघर जंगल में सरकारी वाहन को देखकर मारुति वैन में सवार एक व्यक्ति गाड़ी मौके पर छोड़कर भाग गया। वैन में अवैध मादक पदार्थ होने के शक पर पुलिस ने तलाशी ली। गहन जांच में वैन से 84 किलो 400 ग्राम अवैध अफीम बरामद हुई। पुलिस ने अफीम जब्त कर जांच शुरू की। गाड़ी मालिक से पूछताछ में दो नाम सामने आए जांच में मारुति वैन ईश्वर वैष्णव पुत्र शंकर दास वैष्णव निवासी दांथल के नाम पर रजिस्टर्ड मिली। पुलिस ने ईश्वर को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पूछताछ में उसने श्यामलाल बलाई पुत्र सोमनाथ बलाई निवासी दांथल और मनोहर लाल पुत्र मांगीलाल धाकड़ की भूमिका सामने आने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने तीनों को NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया। 13 गवाह और 121 दस्तावेज बने आधार मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित करने के लिए 13 गवाहों के बयान करवाए और 121 दस्तावेज कोर्ट में पेश किए। साक्ष्यों के आधार पर विशिष्ट न्यायाधीश, NDPS एक्ट, भीलवाड़ा ने ईश्वर वैष्णव, श्यामलाल बलाई और मनोहर लाल धाकड़ को दोषी माना। कोर्ट ने तीनों दोषियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।