पंचायत चुनाव में भाजपा अब क्षेत्रवार राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाने में जुटी है। मारवाड़ में कांग्रेस और आरएलपी, जबकि वागड़ में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) की चुनौती को देखते हुए पार्टी का जोर जीताऊ चेहरों के चयन पर है। प्रदेश मुख्यालय में रविवार को देर रात तक जारी संभागवार बैठकों में स्थानीय समीकरणों, नेताओं के प्रभाव और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की जा रही है। पहले चरण के चुनावों के लिए सोमवार सुबह सभी जिला प्रभारियों व जिला अध्यक्षों को प्रत्याशियों के नामों की सूची दे दी जाएगा। ताकि नामांकन की प्रक्रिया शुरु की जा सके। मारवाड़ में कांग्रेस-आरएलपी, वागड़ में बीएपी पर नजर : मारवाड़ में कांग्रेस के साथ आरएलपी की मौजूदगी को भी रणनीति में शामिल करने पर जोर है। खासकर नागौर से जुड़े राजनीतिक समीकरणों में आरएलपी की भूमिका चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय नेताओं का मानना है कि कुछ क्षेत्रों में मुकाबला बहुकोणीय हो सकता है। ऐसे में उम्मीदवार तय करते समय स्थानीय राजनीतिक हालातों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं, वागड़ क्षेत्र में बीएपी की राजनीतिक मौजूदगी भाजपा के लिए अहम चुनौती मानी जा रही है। आदिवासी बहुल इलाकों में पार्टी को सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय मुद्दों को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों के चयन पर विचार करना होगा। संभागवार बैठकों में अजमेर क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर भी मंथन हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी बैठक में शामिल हुए। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन महामंत्री अजेय कुमार और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी बैठकों में मौजूद रहे। पार्टी की कवायद का फोकस स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक उम्मीदवारों का चयन करना है। ओबीसी व मूल ओबीसी को साधेगी भाजपा पंचायत चुनाव से पहले भाजपा ने राजस्थान में ओबीसी और मूल ओबीसी जातियों तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति तैयार की है। भाजपा की इस कवायद में ओबीसी के अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने पर जोर है। पार्टी चाहती है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं व उपलब्धियों की जानकारी इन समुदायों तक पहुंचे। इसके लिए प्रदेश ओबीसी मोर्चा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की तैयारी है। पार्टी के राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष अमरपाल मौर्य ने प्रदेश मोर्चा की बैठक लेकर जातियों को संगठन से जोड़ने के निर्देश दिए। ओबीसी व मूल ओबीसी के भीतर कई जातियां शामिल हैं। इनकी स्थानीय आबादी, राजनीतिक प्रभाव और प्रतिनिधित्व एक जैसा नहीं है। ऐसे में पार्टी के लिए केवल व्यापक ओबीसी वर्ग तक पहुंच बनाना ही नहीं, बल्कि अलग-अलग जातियों के बीच भी संगठन का संपर्क मजबूत करना महत्वपूर्ण है।