राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत स्कूली शिक्षा में बदलाव का असर अब गणित की पढ़ाई पर भी दिखाई देने लगा है। नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (एनसीएफएसई)-2023 की सिफारिशों के अनुरूप सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन-सीबीएसई की कक्षा 9 के लिए गणित की नई पाठ्य-पुस्तकें ‘गणित-मंजरी भाग-1’ और ‘भाग-2’ जारी की गई हैं। इनमें विद्यार्थियों को गणित रटने के बजाय समझने, सोचने और तर्क करने के लिए प्रेरित किया गया है। एक्सपर्ट देव शर्मा के अनुसार, दोनों पुस्तकों की विषय-वस्तु का केंद्र विद्यार्थियों में गणितीय जिज्ञासा पैदा करना और तार्किक चिंतन विकसित करना है। शाब्दिक समस्याओं, पहेलियों और गतिविधियों के जरिए विश्लेषण क्षमता तथा समस्या-समाधान कौशल को मजबूत करने का प्रयास किया गया है। ‘गणित है क्या’ से शुरू होती है नई सोच : ‘गणित-मंजरी भाग-1’ में विषय की शुरुआत से पहले वेदांग ज्योतिष के प्रसिद्ध श्लोक के माध्यम से गणित की महत्ता बताई गई है। वहीं पुस्तक के अंतिम पृष्ठ पर गैलीलियो का कथन ‘ब्रह्मांड एक बृहद पुस्तक है, जिसे गणित की भाषा में लिखा गया है’ विद्यार्थियों को गणित के व्यापक महत्व से परिचित कराता है।