बूंदी के नैनवां क्षेत्र में गुरुवार को दोपहर 3:30 से 4:30 बजे तक हुई करीब 18 MM बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। बंबूली गांव में खेतों में पानी भर गया और कटी हुई उड़द की फसल पानी में डूब गई। कई खेतों में शुक्रवार को भी पानी जमा रहा। पानी में पड़ी उड़द की फसल में सड़न शुरू हो गई है, जबकि कई खेतों में खड़ी फसल में भी फंगस लगने की बात सामने आई है। बंबूली गांव में करीब 1500 किसानों की फसल प्रभावित हुई है। किसानों के अनुसार, पानी भरने वाले लगभग सभी खेतों में फसल को नुकसान पहुंचा है। नैनवां क्षेत्र में इस समय उड़द की फसल लगभग पूरी तरह कट चुकी है, जबकि सोयाबीन की फसल अभी खेतों में खड़ी है। लगातार पानी भरने से दोनों फसलों में फंगस लगने और सड़ने का खतरा बना हुआ है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के बाद हुई बारिश ने उनकी लागत और संभावित आमदनी दोनों पर संकट खड़ा कर दिया है। कई किसानों के सामने बेटियों की शादी, ट्रैक्टर की किस्त और खेती का कर्ज चुकाने की चिंता है। किसानों ने सरकार से तत्काल फसल खराबे का सर्वे करवाकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। नैनवां में 55 हजार हेक्टेयर में उड़द- सोयाबीन नैनवां क्षेत्र में इस साल बड़े क्षेत्र में उड़द और सोयाबीन की खेती हुई है। आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में करीब 29,396 हेक्टेयर में उड़द और 26,555 हेक्टेयर में सोयाबीन की फसल है। इनमें करीब 29 हजार हेक्टेयर उड़द की फसल कट चुकी है, जबकि करीब 26 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की फसल अभी खड़ी है। कटी हुई उड़द बारिश के पानी में भीगने से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। किसानों के अनुसार, यदि खेतों में पानी जल्दी नहीं सूखा तो फसल के सड़ने से नुकसान और बढ़ सकता है। पानी में डूबी महीनों की मेहनत नैनवां क्षेत्र उड़द और सोयाबीन की खेती के लिए प्रमुख माना जाता है। गुरुवार की बारिश के बाद बंबूली समेत आसपास के खेतों में पानी भर गया। कई किसानों की काटकर रखी गई उड़द पानी में डूब गई। खेतों में अभी भी पानी जमा होने से किसान फसल को बाहर निकालने और बचाने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि करीब 15 दिन पहले भी बारिश हुई थी, लेकिन इस बार कम समय में हुई तेज बारिश से कटी हुई फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है। 25-30 क्विंटल उड़द की उम्मीद, बेटियों की शादी का सपना टूटा किसान बाबूलाल बैरवा ने बताया कि उन्हें इस बार 25 से 30 क्विंटल उड़द की पैदावार की उम्मीद थी। इससे करीब 2.5 लाख रुपए की आमदनी होने की संभावना थी। इसी रकम से वे अपनी दो बेटियों की शादी करने की तैयारी कर रहे थे। बारिश में फसल खराब होने के बाद अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बाबूलाल को उम्मीद है कि सरकार सर्वे करवाकर किसानों को राहत देगी। 25 बीघा फसल से ट्रैक्टर की किस्त चुकानी थी किसान नरेंद्र नागर ने बताया कि उन्होंने 25 बीघा में उड़द की फसल बोई थी। इससे करीब 2 लाख रुपए मिलने की उम्मीद थी और इसी रकम से ट्रैक्टर की किस्त चुकानी थी। उन्होंने फसल पर प्रति बीघा करीब 5 हजार रुपए खर्च किए थे। बारिश के बाद फसल पानी में डूबने से उनकी लागत और अपेक्षित आमदनी दोनों पर संकट आ गया है। अब उन्हें सरकारी मुआवजे का सहारा है। 31 बीघा उड़द भी पानी में डूबी किसान हेमराज बैरवा की 4 बीघा उड़द की फसल भी पानी में डूब गई। वहीं कमल बैरवा और उनके भाइयों की करीब 27 बीघा उड़द की पूरी फसल बारिश की चपेट में आ गई। इस तरह दोनों किसानों की करीब 31 बीघा उड़द की फसल प्रभावित हुई है। बीमा कंपनी पर किसान ने उठाए सवाल किसान राकेश धाकड़ ने फसल बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियां केवल खानापूर्ति करती हैं। राकेश के मुताबिक, पिछली बार सीमा जनरल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से बीमा किया गया था, लेकिन फसल खराब होने के बावजूद उन्हें मुआवजा नहीं मिला। इस बार भी फसल खराब होने के बाद उन्हें बीमा क्लेम को लेकर चिंता है। कृषि विभाग के शुरुआती आकंलन में 30 से 40 फीसदी खराबा सहायक कृषि अधिकारी कुशराज नागर ने बताया कि लगातार बारिश से उड़द की फसल क्वालिटी के हिसाब से काफी खराब हो चुकी है। खेतों में कटी पड़ी फसल भीगने से उसमें सड़न शुरू हो गई है। नुकसान का सही आंकड़ा मौसम साफ होने और धूप निकलने के बाद ही सामने आएगा। शुरुआती आकलन में 30 से 40 फीसदी तक खराबा माना जा रहा है। कुशराज नागर ने बताया कि सभी कृषि पर्यवेक्षक फील्ड में हैं और गांव-गांव जाकर सर्वे कर रहे हैं। एक-दो दिन में नुकसान की पूरी रिपोर्ट तैयार होने की संभावना है। 20 से 50 फीसदी फसल बचने की संभावना कृषि विभाग और किसानों के अनुसार पानी उतरने के बाद कुछ फसल बचने की संभावना है, लेकिन यह खेत में पानी कितनी देर रहता है और मौसम कैसा रहता है, इस पर निर्भर करेगा। अनुमान के मुताबिक करीब 20 से 50 फीसदी तक फसल बच सकती है, जबकि ज्यादा समय तक पानी में रहने वाली फसल में फंगस लगने, सड़ने और गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। जिले में 65 हजार हेक्टेयर उड़द, 38 हजार हेक्टेयर सोयाबीन बूंदी जिले में इस साल करीब 65 हजार हेक्टेयर में उड़द और 38 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई है। ऐसे में नैनवां क्षेत्र में बारिश से हुए नुकसान का असर बड़ी संख्या में किसानों पर पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से फसल खराबे का सर्वे कराया जा रहा है, जिसके बाद नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। इस साल जिले में औसत बारिश 607.43 MM जिले में इस साल अब तक औसत 607.43 MM बारिश दर्ज हुई है। गत वर्ष इसी अवधि में 1450.07 MM बारिश हुई थी। इस साल सबसे ज्यादा बारिश नैनवां में 761 MM और सबसे कम इंद्रगढ़ में 465 MM दर्ज हुई है। अगले 24 घंटे में बारिश की संभावना बनी हुई है, हालांकि नैनवां क्षेत्र में भारी बारिश की चेतावनी नहीं है। ऐसे में खेतों में पहले से जमा पानी किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। ग्राउंड रिपोर्ट: बंबूली, नैनवां (बूंदी) से मुकेश नागर