जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में चल रहे दो दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण का समापन मंगलवार को हुआ। प्रभागाध्यक्ष उमा सारस्वत के मार्गदर्शन में लगे शिविर में स्कूलों में उपलब्ध बाल साहित्य के प्रभावी उपयोग, पुस्तकालयों के सही संचालन और विद्यार्थियों में पठन-अभिरुचि, कल्पनाशीलता व अभिव्यक्ति कौशल विकसित करने के गतिविधि-आधारित तरीकों पर चर्चा की गई। प्रभागाध्यक्ष सारस्वत ने कहा कि बाल साहित्य विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने के साथ-साथ उनकी भाषा, कल्पनाशक्ति और चिंतन क्षमता को समृद्ध करता है। पुस्तकालय की पुस्तकें तभी सार्थक शैक्षिक संसाधन बनती हैं, जब वे विद्यार्थियों के हाथों तक पहुंचकर उनके विचारों और संवाद का हिस्सा बनें। पूर्व डाइट प्राचार्य व उप निदेशक गोविंद सिंह राठौड़ ने कहा कि पुस्तकें व्यक्तित्व निर्माण की सशक्त साथी हैं। वे बच्चों को पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर उससे आगे सोचने और नए विचारों से जुड़ने का अवसर देती हैं। प्रशिक्षण के दौरान दक्ष प्रशिक्षक देवदास स्वामी ने विभिन्न रोचक गतिविधियों के माध्यम से बाल साहित्य की व्यावहारिक उपयोगिता समझाई। संभागियों ने पुस्तक चर्चा, पुस्तक समीक्षा तथा विद्यार्थियों में नियमित पठन-पाठन की आदत विकसित करने से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की। प्रशिक्षण के सफल आयोजन और समन्वय में तारा लक्ष्मी, सुरेश डूडी तथा दशरथ नैण का विशेष सहयोग रहा। एसआरजी व प्राचार्य सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि स्कूलों में स्थित पुस्तकालयों को केवल पुस्तकों के संग्रह तक सीमित न रखकर स्वतंत्र अध्ययन, चिंतन और संवाद का जीवंत केंद्र बनाया जाए। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल भावना के अनुरूप है। प्रभागाध्यक्ष विजयलक्ष्मी शेखावत ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों में स्वाभाविक जिज्ञासा, कल्पनाशीलता और सृजनात्मकता विकसित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।