चित्तौड़गढ़ शहर में साइबर ठगी का मामला सामने आया है। शहर के बापूनगर, सेंती निवासी एक ऑटो पार्ट्स कारोबारी के बैंक खाते से बिना उसकी जानकारी और अनुमति के 1 लाख 78 हजार 500 रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। पीड़ित को जब खाते से राशि निकलने की जानकारी मिली तो उसने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। इस मामले में कोतवाली थाना पुलिस ने पीड़ित की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खाते से राशि किस माध्यम से निकाली गई और इस पूरे मामले में कौन लोग शामिल हैं। मामला साइबर फ्रॉड से जुड़ा होने के कारण पुलिस बैंक रिकॉर्ड और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटा रही है। तीन बार में निकाली गई राशि कोतवाली थानाधिकारी रजनीश कुमार ने बताया- बापूनगर सेंती, बड़ौदा बैंक के पीछे रहने वाले रवि कुमार बिलोची ने थाने में रिपोर्ट दी है। रवि कुमार ऑटो पार्ट्स की दुकान का काम करते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 29 सितंबर को उनके यूनियन बैंक खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन हुए। इसमें पहली बार 50 हजार रुपए, दूसरी बार 75 हजार रुपए और तीसरी बार 53 हजार 500 रुपए की राशि ट्रांसफर की गई। इस तरह उनके खाते से कुल 1 लाख 78 हजार 500 रुपए की राशि चली गई। पीड़ित के अनुसार यह सभी ट्रांजेक्शन उनकी जानकारी के बिना हुए हैं। उन्होंने ना तो खुद यह राशि किसी को भेजी और ना ही किसी अन्य व्यक्ति को अपने खाते से पैसा ट्रांसफर करने की अनुमति दी थी। पीड़ित ने जताई ठगी की आशंका रवि कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके खाते से हुई राशि की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने बैंक खाते की जांच की। जांच में सामने आया कि अलग-अलग समय पर बड़ी राशि ट्रांसफर की गई है। इसके बाद उन्हें इस बात की आशंका हुई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने साइबर माध्यम से उनके साथ धोखाधड़ी की है। पीड़ित ने पुलिस से मामले की पूरी जांच करने और खाते से गई राशि को वापस दिलाने के लिए कार्रवाई करने की मांग की है। जांच के लिए पीड़ित ने जरूरी बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन से जुड़ी जानकारी, मोबाइल स्क्रीनशॉट और अन्य दस्तावेज उपलब्ध करवाए हैं। जानकारी जांचने में लगी पुलिस साइबर ठगी के मामलों में सबसे जरूरी भूमिका ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी की होती है। इसी को देखते हुए पुलिस अब संबंधित बैंक से खाते की जानकारी और ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड जुटा रही हैं। इसके अलावा यह भी जांच की जाएगी कि पीड़ित के खाते से निकली राशि किस खाते में गई और उसे आगे कहां-कहां ट्रांसफर किया गया।