चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर भीमलत कुंड पर शनिवार को सर्व पितृ अमावस्या के मौके पर पितरों के साथ-साथ चित्तौड़ की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले अमर वीरों और वीरांगनाओं का भी सामूहिक रूप से तर्पण किया गया। चित्तौड़गढ़ गौरव तीर्थ प्रन्यास और ओम तत्सत् पारमार्थिक संस्थान की ओर से हुए इस कार्यक्रम में 1000 से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए। वैदिक मंत्रों के बीच श्रद्धालुओं ने कुश, तिल और जल से अपने पूर्वजों का तर्पण किया। इसके बाद चित्तौड़ दुर्ग के वीरों को भी जल अर्पित किया गया। आयोजन का मुख्य संदेश यही रहा था कि इतिहास के उन बलिदानियों को भी याद रखा जाए जिनकी वजह से चित्तौड़ की पहचान पूरे देश में बनी। संतों ने चित्तौड़ के इतिहास और संस्कृति का बताया महत्व कार्यक्रम में संत अवधूत निरंजन नाथ ने कहा- चित्तौड़गढ़ केवल एक ऐतिहासिक दुर्ग नहीं बल्कि शौर्य, स्वाभिमान और त्याग की पहचान है। यहां का इतिहास नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देता है। इस दौरान रामद्वारा के दिग्विजय राम, यति जी उपासरा के विनोद यति महाराज, दुर्ग स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर के महंत जगन्नाथ भारती और संत नारायण सिंह महाराज सहित कई संतों ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। आयोजकों ने बताया- कार्यक्रम का उद्देश्य धार्मिक परंपरा निभाने के साथ चित्तौड़ के गौरवशाली इतिहास को भी लोगों तक पहुंचाना है। धार्मिक आयोजनों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी जोड़ना जरूरी है। 108 कुंडीय हवन और वैदिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए कार्यक्रम की शुरुआत यजुर्वेद के मंत्रोच्चार के साथ हुई। ओम तत्सत् पारमार्थिक संस्थान के अध्यक्ष और ज्योतिषाचार्य विकास उपाध्याय के नेतृत्व में 21 पंडितों तथा श्री सांवलिया जी वेद विद्यालय के 21 बटुकों ने 108 कुंडीय हवन कराया। सैकड़ों यजमान अपने परिवार के साथ हवन में शामिल हुए और वैदिक मंत्रों के बीच आहुतियां दीं। पूरे आयोजन के दौरान भीमलत कुंड का परिसर धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा। पुरुष सफेद, केसरिया और गेरुए वस्त्रों में जबकि महिलाएं पारंपरिक लाल-पीली वेशभूषा में पहुंचीं। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से पूरा परिसर धार्मिक माहौल में नजर आया। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया, कई गणमान्य लोग रहे मौजूद आयोजन के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पर्यावरण संरक्षण और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी दिया गया। श्रद्धालुओं ने दुर्ग परिसर में बंदरों को केले, गायों को लापसी और मछलियों को आटा खिलाया। पूरे आयोजन को प्लास्टिक मुक्त रखा गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक मयंक, नगर प्रचारक देवांग, श्रवण सिंह राव, वरिष्ठ नागरिक मंच के पदाधिकारी राधेश्याम आमेरिया, अमर कंठ उपाध्याय, विश्व हिंदू परिषद के मुकेश नाहटा, पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सुमेर सिंह सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग मौजूद रहे। भीमलत कुंड पर आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक परंपरा, चित्तौड़ के इतिहास और सामाजिक संदेश को एक साथ जोड़ने का प्रयास देखने को मिला।