चूरू के पीथीसर गांव निवासी प्रशिक्षु अग्निवीर का ओडिशा के ब्रह्मपुर स्थित आर्मी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस खबर से गांव और परिवार में शोक छा गया। अग्निवीर करीब 4 महीने पहले ही सेना में भर्ती हुए थे। पिता लालचंद ने बताया कि महेश कुमार मुहाल (21) ने 20 जून 2026 को सेना जॉइन की थी। वर्तमान में भारतीय सेना में अग्निवीर आर्टिलरी एयर डिफेंस में भर्ती होकर ओडिशा के गोपालपुर में प्रशिक्षण ले रहे थे। गुरुवार को सेना के अधिकारी का फोन आया कि महेश की तबीयत खराब है और उसे ब्रह्मपुर के आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह सुनकर पिता लालचंद बेटे से मिलने के लिए फ्लाइट से जा रहे थे। रास्ते में उन्हें रात करीब डेढ़ बजे महेश के निधन की सूचना मिली। पिछले सोमवार को महेश ने फोन पर पिता से कहा था कि अब वह घर की जिम्मेदारी संभालेगा। पिता ने बताया- बुखार में बेहोश होने के बाद महेश को अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने बताया कि जांच में डेंगू नहीं आया, लेकिन लक्षण डेंगू के लग रहे थे। कॉलेज पूरी करते ही सेना में मिली जोइनिंग पित लालचंद ने बताया क महेश शांत और सरल स्वभाव का था। बीए पास करते ही उसका भारतीय सेना के अग्निवीर आर्टलरी एयर डिफेंस में चयन हो गया था। महेश का छोटा भाई निर्मल चूरू की लोहिया कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष का स्टूडेंट है। सेना में हाईपोस्ट तक जाने का था सपना गांव पीथीसर के आरिफ खान ने बताया कि महेश हंसमुख व शांत स्वभाव का युवा था। वह गांव में बड़े बुजुर्गों की सेवा करना, सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना वाला युवा था। फिलहाल वह सेना में प्रोबेशन में था। मगर उसकी मौत की सूचना के बाद गांव में माहौल गमगीन हो गया। रविवार को पार्थिव देह आने की संभावना महेश के पिता लालचंद ने बताया कि सेना के अधिकारियों से बात हुई थी। तब उन्होंने बताया कि सेना के अधिकारियों के अनुसार शनिवार को पार्थिव देह दिल्ली आ गई है। शाम का समय होने के कारण संभवतया रविवार को पार्थिव देह गांव पहुंच सकती है। सेना में चयन होने पर किया था सम्मान गांव पीथीसर के मोहसिन खान इसेखानी ने बताया कि अगुणा मोहल्ला पीथीसर युवा सम्मान समारोह के अंतर्गत गांव पीथीसर में सरकारी सेवा में चयन होने वाले सभी युवाओं का सम्मान किया गया था। उस समय महेश कुमार मुहाल का भी सम्मान किया गया था। महेश काफी खुशमिजाज युवा था, जो गांव के अन्य युवाओं को भी तैयारी करने की बात कहता था।