बनास नदी के गहलोद पर सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से बनाए गए हाई-लेवल ब्रिज का मंगलवार को कलेक्टर टीना डाबी ने निरीक्षण किया। करीब 134.74 करोड़ रुपए की लागत से सीआरआईएफ योजना के तहत बने 3.340 किमी लंबे ब्रिज के मुख्य हिस्से और एप्रोच का निरीक्षण कर कलेक्टर ने निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया, गुणवत्ता और भार क्षमता की जानकारी ली। पीडब्ल्यूडी के अनुसार यह राजस्थान का सबसे लंबा ब्रिज है। अधिशासी अभियंता जितेन्द्र जांगिड ने कलेक्टर को बताया कि ब्रिज में 2 किमी मुख्य हिस्सा है। दोनों ओर 1.340 किमी एप्रोच है। मुख्य ब्रिज में 40-40 मीटर के 50 स्पान हैं। इंजीनियरों के अनुसार ब्रिज की डिजाइन 243 टन भार क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। परीक्षण के परिणाम निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप पाए गए। 243 टन वजन रखकर ऐसे परखी ब्रिज की ताकत : चार माह पूर्व 26 से 30 मई तक पांच चरणों में लोड टेस्ट के जरिए ब्रिज की संरचनात्मक मजबूती और निर्धारित भार क्षमता जांचने के लिए पांच दिवसीय तकनीकी लोड टेस्ट किया गया। 27-27 टन भार वाले 9 डंपरों के जरिए एक साथ कुल 243 टन वजन पुल पर डाला गया। इस दौरान तापमान का प्रभाव, डिफ्लेक्शन, भार हटाने के बाद रिकवरी, संरचनात्मक मजबूती की लगातार निगरानी की गई। विभाग के अनुसार प्रत्येक चरण में भार डालने और हटाने के बाद ब्रिज की रिकवरी दर्ज की गई। निर्धारित मानकों में 85 प्रतिशत या उससे अधिक रिकवरी संतोषजनक मानी जाती है। गहलोद ब्रिज में 92 प्रतिशत रिकवरी दर्ज हुई। बारिश में 30-40 किमी का चक्कर बचेगा : ब्रिज बनने और उस पर आवागमन शुरू होने के बाद पीपलू, मालपुरा, टोडारायसिंह, फागी, अजमेर की ओर जाने वाली यात्रा सुरक्षित और सुगम हुई है। एक साल पहले तक बारिश में बनास नदी का रपटा जलमग्न होने पर लोगों को सोहेला होकर टोंक आना पड़ता था। इससे जिला मुख्यालय तक पहुंचने में 30 से 40 किमी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी। ब्रिज बनने से इस समस्या से राहत मिलेगी।