दौसा नगर परिषद सभापति चुनाव को लेकर चल रहा सियासी घमासान अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। भाजपा की बागी राधा जायसवाल ने सभापति पद के लिए दाखिल अपना निर्दलीय नामांकन वापस ले लिया है। इसके साथ ही अब सभापति पद के लिए कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होगा। राधा जायसवाल भाजपा से सभापति पद के लिए टिकट की दावेदार थीं, लेकिन पार्टी ने वार्ड 6 की पार्षद कविता गुर्जर को प्रत्याशी बनाया। इसके बाद राधा जायसवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर भाजपा के सामने चुनौती खड़ी कर दी थी। उनके मैदान में आने से कांग्रेस खेमे में उत्साह बढ़ गया था और चुनाव के त्रिकोणीय होने की संभावना बन गई थी। हालांकि, भाजपा नेता जगमोहन मीणा की समझाइश के बाद राधा जायसवाल ने शनिवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा ने राहत की सांस ली, जबकि कांग्रेस खेमे में फिर मायूसी नजर आने लगी। दोनों दलों ने झोंकी पूरी ताकत सभापति की कुर्सी हासिल करने के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पूरी ताकत लगा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से सांसद मुरारीलाल मीणा और विधायक दीनदयाल बैरवा ने कमान संभाल रखी है। कांग्रेस अपने बोर्ड के गठन का दावा कर रही है। वहीं, भाजपा की ओर से जगमोहन मीणा सक्रिय होकर पार्षदों को साधने में जुटे हैं। राधा जायसवाल का नामांकन वापस करवाने के बाद भाजपा ने मुकाबले को लेकर अपनी रणनीति तेज कर दी है। निर्दलीयों के हाथ में चाबी दौसा नगर परिषद में कुल 55 पार्षद हैं। इनमें कांग्रेस के 24, भाजपा के 17 और 14 निर्दलीय पार्षद हैं। ऐसे में किसी भी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। सभापति की कुर्सी तक पहुंचने के लिए दोनों दलों को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। यही वजह है कि अब चुनाव का पूरा दारोमदार 14 निर्दलीय पार्षदों पर आ गया है। दोनों प्रमुख दल निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में करने के प्रयासों में जुटे हैं। साथ ही कांग्रेस और भाजपा दोनों को क्रॉस वोटिंग की आशंका भी है। ऐसे में संख्या बल के बावजूद अंतिम समय तक मुकाबला खुला नजर आ रहा है। 21 सितंबर को होगा फैसला राधा जायसवाल के नामांकन वापस लेने के बाद अब सभापति पद के लिए कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। हालांकि, 14 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और संभावित क्रॉस वोटिंग ने चुनाव को रोचक बना दिया है। अब सभी की निगाहें 21 सितंबर पर टिकी हैं। इसी दिन मतदान के बाद तय होगा कि दौसा नगर परिषद की सभापति की कुर्सी कांग्रेस के पास जाएगी या भाजपा अपना बोर्ड बनाने में सफल होगी।