आदिवासी बहुल डूंगरपुर में छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया जा रहा अनुसूचित जनजाति बालिका छात्रावास अपनी रफ्तार से काफी पीछे चल रहा और निर्माण कार्य अब तक भी पूरा नहीं हो सका। वसुंधरा विहार में करीब 2.18 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे 50 बेड के छात्रावास का निर्माण एक साल में पूरा होना था, लेकिन डेडलाइन बीतने के बाद भी भवन का काम नींव से अब तक केवल बीम तक ही पहुंच पाया है। समाज कल्याण विभाग ने छात्रावास भवन निर्माण के लिए कृषि विपणन बोर्ड को एजेंसी बनाया है। इसके लिए 2 करोड़ 18 लाख 24 हजार 532 रुपए का बजट जारी हुआ था। कार्यादेश के अनुसार निर्माण 5 सितंबर 2025 से शुरू होकर 5 सितंबर 2026 तक पूरा होना था। समय सीमा निकलने के बाद एजेंसी को दो माह की अतिरिक्त अवधि दी गई। हालांकि निर्माण की मौजूदा गति को देखते हुए इस अवधि में भी काम पूरा होने पर सवाल है। ^ छात्रावास में इस्तेमाल निर्माण सामग्री की मौके पर जांच करवाई जाएगी। एजेंसी ने तय समय में काम पूरा नहीं किया है, जिसकी रिपोर्ट कलेक्टर की साप्ताहिक समीक्षा में पेश की गई है। एजेंसी और ठेकेदार के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। - हेमंत सैनी, उपनिदेशक, समाज कल्याण विभाग छात्रावास निर्माण में उपयोग की जा रही सीमेंट की ईंटों और अन्य सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। निर्माण ऐजेंसी की ओर से लगाए गए ठेकेदार द्वारा भवन निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। मौके पर कुछ ईंटें ऊंचाई से गिराने पर टूटती मिलीं। निर्माण में उपयोग हो रही सीमेंट की ईंटों में उपयोग की गई रेत में काली मिट्टी मिली होने तथा बीम के सहारे बनी दीवारों से सीमेंट उखड़ने की स्थिति भी सामने आई। इन सभी बातों को देखते हुए समाज कल्याण विभाग द्वारा भवन के निर्माण कार्य की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े हो रहे हैं।