प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए शुरू की जा रही विद्या संबल योजना (गेस्ट फैकल्टी) एक बार फिर प्रशासनिक नीतिगत स्पष्टता के अभाव में विवादों और असमंजस के घेरे में आ गई है। 18 अगस्त को जिला कलेक्टरों को जारी पत्र के बाद विभिन्न जिलों में आनन-फानन में गेस्ट फैकल्टी लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई लेकिन राज्य स्तर से एक समान दिशा-निर्देश न होने के कारण नागौर और भीलवाड़ा जैसे जिलों में आदेश जारी करने के तुरंत बाद उन्हें विड्रॉ (वापस) करना पड़ा। सबसे बड़ा संकट राज्य के करीब 25,500 सरप्लस शिक्षकों के वेतन को लेकर सामने आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में राज्य में लगभग 25,500 शिक्षक बिना स्वीकृत पद के कार्यरत हैं। ये स्थितियां स्कूलों के मर्ज होने, एक ही पद पर डबल पोस्टिंग, बिना स्वीकृत पद के किए तबादलों, महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में बचे हिंदी माध्यम के शिक्षकों तथा राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद में नए चयन के कारण उत्पन्न हुई हैं। वर्तमान में इन शिक्षकों का वेतन अन्य स्कूलों के स्वीकृत एवं रिक्त पदों से आहरित किया जा रहा है।