धौलपुर नगरपरिषद के सभापति चुनाव ने जिले की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। 60 वार्डों में कांग्रेस के पास 27 पार्षद थे, लेकिन वह बहुमत से 4 कदम दूर रह गई। वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी गिरीश गर्ग अलग-अलग राजनीतिक खेमों का समर्थन जुटाकर निर्विरोध सभापति चुन लिए गए। चुनाव परिणाम के बाद गिरीश गर्ग की राजनीतिक नजदीकियों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। सभापति बनने के बाद गर्ग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का आभार जताया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके स्वागत में उन्हें भाजपा का पट्टा भी पहनाया। इसके बाद गर्ग कांग्रेस विधायक शोभारानी कुशवाह के घर भी पहुंचे और उनका आभार व्यक्त किया। सोशल मीडिया पर सामने आई इन तस्वीरों के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। बहुमत से 4 सीटे दूर रही कांग्रेस सवाल उठ रहा है कि 27 पार्षदों वाली कांग्रेस सभापति की कुर्सी तक क्यों नहीं पहुंच पाई। नगरपरिषद चुनाव में कांग्रेस को 27, भाजपा को 11, बसपा को 3 और निर्दलीयों को 9 सीटें मिली थीं। बहुमत के लिए 31 पार्षदों की जरूरत थी, यानी कांग्रेस बहुमत से सिर्फ 4 पार्षद दूर थी। सभापति चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस और भाजपा दोनों खेमों में रणनीतिक तैयारियां तेज हो गईं। कांग्रेस की तरफ से विधायक शोभारानी कुशवाह और पूर्व विधायक बीएल कुशवाह सक्रिय थे। वहीं, भाजपा की तरफ से डॉ. शिवचरण कुशवाह और पूर्व पशुधन बोर्ड अध्यक्ष जगमोहन बघेल ने कमान संभाली। राजनीतिक चर्चाओं में कांग्रेस के अंदर भी अलग-अलग खेमों के सक्रिय होने की बात सामने आई। हालांकि, कांग्रेस पार्षदों के अलग-अलग गुटों में होने के दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व सीएम राजे के करीबी नेता माने जाते है गर्ग कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों के बीच भाजपा समर्थित खेमे ने कारोबारी गिरीश गर्ग को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा। गर्ग को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी नेताओं में गिना जाता है। साल 2020 के नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वे चुनाव हार गए थे। इस बार उन्होंने निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा और अलग-अलग राजनीतिक खेमों के पार्षदों का समर्थन जुटाकर निर्विरोध सभापति का चुनाव जीत लिया।