बीएड प्रवेश में बीकानेर संभाग के जिलों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। बीकानेर में जहां 84 फीसदी सीटों पर प्रवेश हो चुका है, वहीं हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में आधे से ज्यादा सीटें अब भी खाली हैं। श्रीगंगानगर में स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण है। यहां 4,420 निर्धारित सीटों में से 2,636 सीटों पर प्रवेश नहीं हुआ है। यानी जिले की करीब 60 फीसदी सीटें रिक्त हैं। हनुमानगढ़ में भी स्थिति इससे बहुत अलग नहीं है। जिले के 34 बीएड कॉलेजों में 4,030 सीटें निर्धारित हैं, जिनमें से 2,297 सीटें खाली हैं। यहां रिक्त सीटों का प्रतिशत 56.99 है। इसके मुकाबले बीकानेर जिले में प्रवेश की स्थिति काफी बेहतर रही। जिले के 20 कॉलेजों की 2,260 सीटों में से 1,883 सीटें भर चुकी हैं। केवल 377 सीटें ही रिक्त हैं। इस तरह जिले में करीब 84 फीसदी सीटों पर प्रवेश हो गया है। बीएड कॉलेजों में नया शिक्षा सत्र 1 सितंबर से शुरू हो चुका है। इसके बावजूद रिक्त सीटों को भरने के लिए प्रवेश प्रक्रिया जारी है। नोडल एजेंसी ने पहले 28 सितंबर तक विशेष अवसर दिया था। अब 30 सितंबर तक अंतिम अवसर दिया गया है। पीटीईटी प्रवेश परीक्षा समन्वयक के अनुसार इसके बाद प्रवेश की तारीख बढ़ाए जाने की संभावना नहीं है। प्रदेश में भी 40 हजार से ज्यादा सीटें रिक्त संभाग की तरह प्रदेशभर के बीएड कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं। राज्य के 942 कॉलेजों में 40 हजार से अधिक सीटों पर प्रवेश नहीं हो पाया है। यह कुल सीटों का करीब 38 फीसदी है। चार चरणों की प्रवेश प्रक्रिया के बाद कॉलेजों को डायरेक्ट एडमिशन का अवसर भी दिया गया, लेकिन इसके बावजूद सभी सीटें नहीं भर सकीं। संभाग में 5,300 से अधिक सीटें खाली विषय आवंटन और आरक्षण नीति की अनदेखी : श्रीमाली पीटीईटी में प्रवेश के दौरान राज्य सरकार की निर्धारित नीति का पालन नहीं हुआ। नियमों के अनुसार 70% कला, 20% विज्ञान और 10% वाणिज्य वर्ग के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाना है। साथ ही एससी, एसटी और ओबीसी के लिए निर्धारित आरक्षण का भी ध्यान नहीं रखा गया। विद्यार्थियों को उनके चयनित कॉलेजों में प्रवेश दे दिया गया, जिससे विषयवार सीट आवंटन और आरक्षण नीति के अनुपालन पर सवाल खड़े होते हैं। - प्रो.राजेंद्र कुमार श्रीमाली शिक्षाविद‌्