स्कूली शिक्षा में गुणात्मक सुधार और शिक्षकों के सामाजिक उत्तरदायित्व को लेकर दो दिवसीय शैक्षिक सम्मेलन का शुभारंभ किया। देलवाड़ा खंड के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शिशवी में आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजसमंद की ओर से किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समाज में एकता, समरसता और भावी पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति का भाव जगाने में शिक्षकों की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। सम्मेलन के पहले दिन संगठन के वार्षिक प्रतिवेदन के साथ-साथ जिले भर से आए शिक्षकों की व्यक्तिगत और विभागीय समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया। उद्घाटन सत्र के दौरान शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों सहित जिले के सैकड़ों शिक्षक प्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद रहे। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने शिक्षकों को देश का भविष्य निर्माता बताते हुए कहा कि वे जैसा आचरण और संस्कार बच्चों में विकसित करेंगे, वैसा ही भविष्य का भारत बनेगा। सत्र में संत परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि ज्ञान और अनुभव को किसी जाति या बंधन में नहीं बांधा जा सकता। वक्ताओं ने सभी से अपने व्यवहार में समरसता का भाव जागृत कर शक्तिशाली भारत के निर्माण में सहयोग देने का आह्वान किया। इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी शिक्षकों को पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।