राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मनदर्पण-2 एवं राज ममता कार्यक्रम में जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) का पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुक्रवार को संपन्न हुआ। 5 से 9 अक्टूबर तक आयोजित प्रशिक्षण में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं तनाव प्रबंधन के पांच मॉड्यूल के माध्यम से स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रशिक्षित किया। स्वास्थ्य भवन में आयोजित समापन कार्यक्रम में डिप्टी सीएमएचओ डॉ. निशांत सैनी मुख्य अतिथि रहे। प्रशिक्षण के दौरान न्यूरोसाइकियाट्रिस्ट डॉ. अनुराग खींची ने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण, लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में जानकारी दी। डॉ. खींची ने कहा कि एंग्जाइटी, डिप्रेशन, फोबिया, कन्वर्जन डिसऑर्डर और ओसीडी सहित विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ स्किजोफ्रेनिया एवं बाइपोलर डिसऑर्डर की समय पर पहचान और उपचार जरूरी है। उन्होंने वृद्धावस्था में होने वाले डिमेंशिया व अल्जाइमर तथा बच्चों से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में भी बताया। डॉ. खींची ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को छिपाने के बजाय समय पर साझा करना चाहिए। समाज में मानसिक बीमारियों को लेकर फैली भ्रांतियों और अंधविश्वासों को दूर करना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने सीएचओ से गांवों, स्कूलों, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर आमजन व विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच, नियमित ध्यान और संतुलित जीवनशैली मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हैं। समस्याओं की समय रहते पहचान और उचित सहायता से स्थिति को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है। प्रशिक्षण के समन्वयक साइकियाट्रिक केयर नर्स राजेंद्र कुमार रहे।