स्मार्ट मीटर लगाने के अभियान के बीच बिजली निगम की बड़ी लापरवाही मिली है। कई घरों में स्मार्ट मीटर लगे ही नहीं, लेकिन निगम के ऑनलाइन रिकॉर्ड में नया स्मार्ट मीटर नंबर दर्ज हो गया है। जब मीटर रीडर उपभोक्ताओं के घर पहुंचा, तो पुराना मीटर मिला। उसका नंबर रिकॉर्ड में दर्ज स्मार्ट मीटर के नंबर से अलग था। इससे मीटर रीडर रीडिंग दर्ज नहीं कर पा रहा है और उपभोक्ताओं के बिल अटक गए हैं। उपभोक्ताओं को डर है कि समय पर बिल जमा नहीं होने से कनेक्शन कट जाएगा। इधर, निगम से जुड़े अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक रीडर के सर्किल में 1000 से 1200 मीटर में से 25 से 30 शिकायत सामने आई हैं। जहां मौके पर पुराने मीटर लगे हैं, लेकिन ऑन-स्पॉट बिल बनाते समय नंबर मैच नहीं होने पर बिल नहीं बन रहा है। कई ग्राहकों ने इसकी शिकायत दर्ज करवाई है। शहरभर में करीब 200 लोगों के मीटर के नंबर बदलने की समस्या सामने आई है। एईएन बोलीं- शिकायतें मिली हैं, कंपनी सर्वे करेगी कुछ जगह मीटर नंबर अलग होने से बिल न बनने की शिकायतें सामने आई हैं। इस संबंध में स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी जीनस को पत्र लिखा है। कंपनी की टीम अब घर-घर जाकर सर्वे करेगी और स्थायी समाधान निकालेगी। -शीतल पटेल, एईएन, बिजली निगम एसई ने कहा- कोई शिकायत नहीं मिली है शहर में स्मार्ट मीटर के लिए कोई एरिया तय नहीं किया गया है। जहां भी नए या खराब मीटर बदले जा रहे हैं, वहां स्मार्ट मीटर ही लगा रहे हैं। अभी तक एक ही कनेक्शन पर दो मीटर नंबर होने की कोई शिकायत नहीं आई है। -केआर मीणा, एसई, बिजली निगम रीडर बोला- नंबर मैच नहीं हुए अग्रसेन नगर निवासी राजकुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले आए मीटर रीडर ने साफ कह दिया कि बिल नहीं बनेगा, क्योंकि मीटर के नंबर मैच नहीं हो रहे हैं। रीडर ने सुझाव दिया कि 0 से रीडिंग सेट करके बिल बनाना पड़ेगा, लेकिन ऐसा करने पर 15 से 20 हजार रुपए का भारी-भरकम बिल आ जाएगा। रीडर ने उन्हें कार्यालय में जानकारी देने को कहा है। राजकुमार के अनुसार जब तक मीटर नंबर सही नहीं होगा, बिल नहीं बनेगा। बिना मीटर लगाए लौटाया : उदियापोल निवासी केपी अग्रवाल ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगवाना या न लगवाना पूरी तरह ग्राहक की इच्छा पर निर्भर है। उन्होंने घर पहुंची टीम को मीटर लगाने से साफ मना कर दिया था। टीम बिना मीटर लगाए लौट गई। इसके बावजूद रिकॉर्ड में उनके नाम पर नया स्मार्ट मीटर लगा हुआ बता दिया गया और नया नंबर अपलोड कर दिया गया। करीब 10 दिन पहले जब रीडर पहुंचा, तो नंबर मैच न होने से बिल नहीं बन पाया। बिल में आ गए दो-दो नए नंब सर्वऋतु विलास निवासी अंबालाल ने बताया कि उनके पास दो बिल आए हैं और दोनों में अलग-अलग मीटर नंबर लिखे हैं, जबकि घर में पुराना मीटर लगा है, जिसका नंबर पिछले बिलों से मैच करता है। इस बार बिल नहीं मिलने पर जब वे बिजली निगम के दफ्तर पहुंचे तो बताया गया कि मीटर बदल चुका है और 6 हजार का बिल बता दिया गया, जबकि उनका बिल कभी इतना नहीं आता। निगम अधिकारियों ने जल्द नया मीटर लगाने का आश्वासन दिया है। 12 हजार स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य शहर में 12 हजार स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है। 8 हजार मीटर लगाए जा चुके हैं। अगले माह से इनके बिल ऑनलाइन जारी होंगे। ऐसे में मौके पर लगे मीटर और रिकॉर्ड दर्ज नंबर में अंतर आने से बिजली निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।