राजस्थान राज्य स्पोर्ट्स काउंसिल ने प्रदेशभर में लंबे समय से उपयोग में नहीं आ रही अपनी खेल संपत्तियों को आय का माध्यम बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। स्पोर्ट्स काउंसिल की ‘अनुपयोगी खेल बुनियादी ढांचे के उपयोग की नीति’ के तहत सभी जिलों में ऐसी संपत्तियों को चिन्हित कर उनका व्यावसायिक और खेल गतिविधियों के लिए उपयोग करने की योजना तैयार की गई है। इस योजना के अनुसार, छह महीने या उससे अधिक समय से किसी उपयोग में नहीं आने वाली जगह को अनुपयोगी मान कर किराए पर देकर कमाई करेगी स्पोर्ट्स काउंसिल। इस दायरे में सिर्फ मैदान और स्टेडियम ही नहीं, बल्कि जिम, स्विमिंग पूल, इंडोर हॉल, बैडमिंटन-टेनिस कोर्ट, शूटिंग व आर्चरी रेंज, कैंटीन, डॉर्मिटरी, कॉन्फ्रेंस हॉल, पार्किंग, विज्ञापन स्थल और ओपन लैंड भी शामिल हैं। खाली जमीन पर अस्थायी खेल सुविधाएं, फिटनेस कैंप, खेल मेले, बच्चों के प्ले जोन, आउटडोर फिटनेस और सीमित अवधि के फूड स्टॉल जैसी गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। स्थायी व्यावसायिक निर्माण और ऐसे उपयोग जिनसे खेल परिसर का स्वरूप प्रभावित हो, प्रतिबंधित रहेंगे। परिषद इसके लिए निजी कंपनियों, फर्मों, सोसायटी, ट्रस्ट, खेल संघों, एनजीओ और अन्य पात्र संस्थाओं को पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया से मैनेजमेंट ऑपरेटर के रूप में जोड़ सकेगी। बड़े स्टेडियम, स्विमिंग पूल और खेल परिसरों को तय अवधि के लिए संचालन एवं रखरखाव सहित सौंपने, जबकि छोटे कोर्ट, कैंटीन, पार्किंग या अन्य सुविधाओं को लाइसेंस का प्रावधान है। प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण शिविरों और अन्य आयोजनों के लिए सुविधाएं अल्प अवधि के लिए किराये पर भी दी जा सकेंगी। आय बढ़ाने के लिए फिक्स्ड लाइसेंस फीस, राजस्व में हिस्सेदारी, हाइब्रिड मॉडल, आयोजन शुल्क और नैमिंग राइट्स जैसे विकल्प रखे गए हैं। प्रमुख स्टेडियम और स्विमिंग पूल में न्यूनतम 25 प्रतिशत, छोटे खेल मैदानों में 20 प्रतिशत और खुले स्थानों में 15 प्रतिशत सकल राजस्व हिस्सेदारी का प्रावधान है। कैंटीन-डॉर्मिटरी जैसी व्यावसायिक सुविधाओं में यह न्यूनतम 30 प्रतिशत तक होगी। कहां-कहां खर्च होगी कमाई