भास्कर न्यूज | सवाई माधोपुर श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा आदर्श नगर (सवाई माधोपुर) के तत्वावधान में आयोजित पर्युषण महापर्व का तीसरा दिन सामायिक दिवस के रूप में तेरापंथ भवन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मंगल महामंत्र से कर प्रवक्ता उपासक पारसमल दुगड़ ने धर्मसभा में कहा कि जैन धर्म का सार यदि एक शब्द में कहना हो तो वह है समता। और समता की साधना का प्रत्यक्ष प्रयोग है सामयिक। सामायिक क्या है? सम् + आय = समभाव में आना। सामायिक का अर्थ है कि राग द्वेष को छोड़कर, पाप व्यापार को छोड़कर, एक मुहूर्त (48 मिनट) तक समता में रहना। सामायिक जैन धर्म का मूल है। जैसे बिना नींव के मकान नहीं टिकता, वैसे बिना सामायिक के श्रावक का चारित्र नहीं टिकता। आचार्य श्री महाश्रमण जी अक्सर फरमाते हैं कि सामायिक आत्मा का व्यायाम है। जैसे शरीर के लिए व्यायाम जरूरी है, वैसे आत्मा के स्वस्थ रहने के लिए सामायिक जरूरी है। तेरापंथ की पहचान है कि मर्यादा, अनुशासन और साधना। तेरापंथ के श्रावकों के लिए प्रतिदिन सामायिक अनिवार्य कर्तव्य माना गया है। सामायिक में श्रावक न तो सावद्य भाषा बोलता है, न आरंभ करता है, न परिग्रह की चिंता करता है। वह 48 मिनट के लिए साधु जैसा बन जाता है। यही कारण है कि तेरापंथ में कहा जाता है कि एक सामायिक एक लाख में, लाख सामायिक एक मोक्ष में। सहयोगी उपासक रमेश कुमार सिंघवी ने इस अवसर पर कहा कि आज के इस भागदौड़ भरे युग में, जहाँ तनाव, अशांति और असंतोष बढ़ रहा है, वहाँ सामायिक एक संजीवनी है। सामायिक दिवस हमें तीन प्रेरणाएं देता है कि हर गृहस्थ रोज कम से कम एक सामायिक अवश्य करे। सामूहिक सामायिक के आयोजनों से वातावरण शुद्ध बनता है। सामायिक सिर्फ क्रिया नहीं, चेतना है कि जीवन भर समभाव में रहने का अभ्यास है। आचार्य भिक्षु ने तेरापंथ की स्थापना ही समता और शुद्धता के लिए की थी। सामायिक उसी शुद्धता की कसौटी है। न दुकान की चिंता, न परिवार का क्लेश कि सिर्फ आत्मा के साथ रमण यही है सच्ची सामायिक। सामायिक दिवस के दिन हम संकल्पित हो कि एक सामायिक के साथ दिन भर समता भाव में रहेंगे और प्राणी मात्र से मैत्री भाव बनाए रखेंगे ताकि अहिंसा के माध्यम से सर्वत्र शांति स्थापित हो।