सुखेर थाना क्षेत्र के भुवाणा में उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की 26 हजार 900 वर्गफीट कीमती जमीन को हड़पने की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। तीन जालसाजों ने फर्जी पंचायती पट्टे तैयार कर अदालत में यूडीए के खिलाफ ही स्थायी निषेधाज्ञा (स्टे) का वाद दायर कर दिया। मामला पकड़ में आने पर यूडीए के भू-अभिलेख निरीक्षक राजेश मेहता की रिपोर्ट पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। दरअसल, भुवाणा में 26 हजार 900 वर्गफीट की इस जमीन को तत्कालीन यूआईटी (अब यूडीए) ने निजी खातेदारों से अवाप्त किया था। संस्था ने खातेदारों को मुआवजा चुकाकर जमीन का भौतिक आधिपत्य लिया और नीलामी के जरिए भूखंड बेचे थे। लिहाजा यह जमीन ग्राम पंचायत भुवाणा की संपत्ति रही ही नहीं। आरोपी दुर्गाशंकर, मोहन सिंह और भैरू सिंह ने जमीन पर अवैध कब्जे के लिए भुवाणा पंचायत के नाम से फर्जी पट्टे तैयार करवा लिए। इसके बाद यूडीए को अपने ही स्वामित्व वाली जमीन से रोकने के लिए अदालत में स्टे याचिका दाखिल कर दी। 2002 की कम्प्यूटर नोटशीट समेत 4 गड़बड़ियों से खुली पोल, पंचायत में तब कम्प्यूटर नहीं था 1. निरस्त हो चुके कानून का हवाला : आरोपियों ने पट्टों में राजस्थान ग्राम पंचायत नियम 1963 का उल्लेख किया, जबकि यह नियम 30 दिसंबर, 1996 को ही निरस्त हो चुका था और 1996 का नया पंचायती राज नियम लागू था। 2. 2002 की टाइप नोटशीट, जबकि कम्प्यूटर था ही नहीं : कोर्ट में पेश पत्रावली की नोटशीट कंप्यूटर से टाइप की हुई है, जबकि साल 2002 में ग्राम पंचायत भुवाणा में कंप्यूटर की कोई सुविधा ही उपलब्ध नहीं थी। 3. रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब : पंचायत समिति बड़गांव की साल 2002 की पट्टा बुक, पंचायत भुवाणा की पट्टा बही या रिकॉर्ड में इन पट्टों की कोई प्रति या इंद्राज मौजूद ही नहीं है। 4. फर्जी दस्तखत : पंचायत सचिव ने यूडीए को लिखित में दिया कि आराजी नंबर 3055 पंचायत की संपत्ति नहीं है और न ही इसकी कोई फाइल पंचायत में है। पट्टों पर सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर भी फर्जी पाए गए।