निकाय चुनाव में पहले चरण के प्रचार का शोर सोमवार शाम थम गया। प्रत्याशी अब घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं। प्रदेश में अधिकांश जगहों पर पहले चरण के प्रचार का अंतिम दिन होने के कारण बड़ी संख्या में नुक्कड़ सभाएं और वाहन रैलियां हुईं। धूमधाम से प्रचार किया गया। उधर, कई पालिकाओं के प्रत्याशी इस बात से डरे हुए हैं कि उनके क्षेत्र में अन्य प्रत्याशी नोट बांटकर चुनाव को प्रभावित न कर दें और समीकरण न बिगाड़ दें। ऐसे में रात को गलियों में पहरा, जासूसी सहित कई हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। उदाहरण से समझें तो पालिका के वार्ड में 500 से एक हजार वोटर होते हैं। ऐसे में अधिकांश जगहों पर जीत-हार का अंतर 50 से 100 वोट का ही रहता है। प्रत्याशी को यह पता रहता है कि कौन-सी गली पक्ष में नहीं है और वहां के मतदाताओं को किस तरह अपने पक्ष में लाने के लिए लालच दिया जा सकता है। 57 लाख मतदाता 20,623 प्रत्याशियों का निर्णय करेंगे पहले चरण में 5393 वार्डों में मतदान है। 7683 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। इस चरण में कुल 57,52,278 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जबकि 20,623 उम्मीदवार मैदान में हैं। दूसरे चरण में 4774 वार्डों के लिए वोट डाले जाएंगे, प्रदेशभर में 9758 मतदान केंद्र तैयार किए गए हैं। इस फेज में 87,60,884 मतदाता पंजीकृत हैं, जबकि चुनाव मैदान में 18,266 प्रत्याशी हैं। मतगणना रूम में एक समय में केवल उसी वार्ड के प्रत्याशी या उनके एजेंट रह सकेंगे, जिसकी गिनती चल रही होगी। बाकी वार्डों के प्रत्याशियों को अलग वेटिंग रूम में इंतजार करना होगा। 100 रु. के स्टांप पर ‘वफादारी’ का हलफनामा... निकाय व स्थानीय चुनावों में समर्थन हासिल करने का एक अनूठा और सियासी हलचल पैदा करने वाला मामला सामने आया है। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के हालिया फैसलों और सवर्ण आरक्षण हितों को लेकर उपजे असंतोष के बीच अब चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों से बाकायदा 100 रुपए के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर शपथ पत्र भरवाया जा रहा है। ‘स्वर्ण न्याय मंच’ के बैनर तले चलाए जा रहे इस अभियान के तहत 1000 से अधिक प्रत्याशियों से समर्थन के एवज में लिखित हलफनामा लिया जा रहा है। यूजीसी पैनल तय करेगा किसे समर्थन देंगे शपथ पत्रों में प्रत्याशी न केवल सामाजिक समर्थन की बात स्वीकार कर रहे हैं, बल्कि जीत के बाद निष्ठा भी मंच के हवाले करने का वचन है। विवादित शर्त बिंदु संख्या 4 में दर्ज है: ‘पार्षद चुनाव जीतने के पश्चात् यूजीसी पैनल तय करेगा कि हमारा समर्थन किस पार्टी की ओर होगा।’ यूजीसी मामले में सवर्ण न्याय मंच के बैनर तले एक हजार से अधिक उम्मीदवारों को समर्थन दिया गया है। स्टांप लिखवा रहे ताकि जीतने के बाद इधर-उधर नहीं जाएं।
-महिपाल मकराना, संयोजक, सवर्ण न्याय मंच जयपुर में सर्वाधिक 26 कार्यकर्ता; पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ उतरे थे मैदान में भाजपा : बागी 41 पदाधिकारी, कई पार्षद निष्कासित भाजपा ने निकाय चुनाव में बगावत करने वाले पदाधिकारियों और पूर्व पार्षदों पर बड़ा एक्शन लिया है। भाजपा ने संगठन के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने, बागी प्रत्याशियों का समर्थन करने और पार्टी लाइन के विपरीत गतिविधियों में शामिल 41 पदाधिकारियों व पूर्व पार्षदों को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। इनमें अधिक जयपुर निगम में हैं। यहां से 26 कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई हुई है। पार्टी के इस फैसले को टिकट वितरण के बाद सामने आई बगावत को रोकने और संगठन में अनुशासन का संदेश देने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण के बाद कई वार्डों में भाजपा के दावेदारों ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया था। कुछ स्थानों पर टिकट से नाराज दावेदारों ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार भी किया। इससे भाजपा के सामने कई वार्डों में अंदरूनी चुनौती खड़ी हो गई थी। पार्टी नेतृत्व की ओर से ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को नामांकन वापस लेने तथा अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में आने का मौका दिया गया था। इसके बावजूद जिन लोगों ने बगावत जारी रखी, उनके खिलाफ अब कार्रवाई की गई है। किसान मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष कई वार्ड अध्यक्ष भी हटाए जयपुर में पार्टी ने मोहनलाल कुमावत (अध्यक्ष वार्ड एक) सीएम शर्मा, विद्याधर नगर मंडल के उपाध्यक्ष नेमीचंद सेन, किसान मोर्चा पूर्व अध्यक्ष अविनाश सैनी को हटाया गया हया। इसके अलावा वार्ड 17 अध्यक्ष राजेश सालोदिया, एससी मोर्चा उपाध्यक्ष मुकेश किराड, पूर्व पार्षद हरिशंकर बोहरा, दिनेश कांवट, राजू अग्रवाल, रमेश सैनी, स्वाति परनामी, विक्रम सिंह तंवर, शिव सोनी, बरखा सैनी पर कार्रवाई हुई है।