सड़क हादसों की भयावहता केवल इंसानों की जिंदगी ही नहीं बदलती, बल्कि बेजुबान गोवंश को भी अपाहिज बनाकर सड़कों पर असहाय छोड़ देती है। ऐसे ही दुर्घटनाग्रस्त और गंभीर रूप से घायल गोवंश के लिए बाड़मेर के लालाणियों की ढाणी मार्ग स्थित श्री पथमेड़ा गो चिकित्सालय वरदान साबित हो रहा है। वर्तमान में इस चिकित्सालय में 1350 से अधिक बीमार, दुर्घटनाग्रस्त गोवंश को चिकित्सा सुविधाओं के बीच नया जीवन जी रहे हैं। संस्थान अध्यक्ष आलोक सिंहल के कुशल नेतृत्व में गो चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को बेहद आधुनिक और सुव्यवस्थित रूप दिया गया है। परिसर में 45 कर्मचारियों का स्टाफ दिन-रात सेवा में जुटा हुआ है। परिसर की नियमित सफाई के साथ कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है ताकि बीमार गोवंश को संक्रमण से बचाया जा सके। चिकित्सालय परिसर में गंभीर रूप से घायल एवं अपने पैरों पर खड़े न हो सकने वाले गोवंश के लिए एक बड़ा आईसीयू वार्ड बनाया गया है, जहां पशु चिकित्सकों की टीम निरंतर निगरानी रखती है। इसके अलावा तीन बड़े धनवंतरी विभाग और 20 विशेष वार्ड तैयार किए गए हैं। घायल गोवंश की सेवा के लिए बने वार्डों में कूलर, पंखों की विशेष सुविधा मीडिया प्रभारी राजूराम बेनिवाल ने बताया कि संस्थान में गोवंश के खान-पान का विशेष ख्याल रखा जाता है। बेजुबानों को रोजाना हरा चारा कटिंग करके और पौष्टिक आहार दिया जाता है। इसके साथ ही रोजाना सुबह-शाम पौष्टिक लापसी खिलाई जाती है। मौसम की मार से बचाने के लिए प्रत्येक वार्ड में जंबो कूलर, पंखे और रोशनी के पुख्ता इंतजाम हैं। गर्मी के दिनों में ठंडी लापसी तथा कड़ाके की सर्दी में इम्युनिटी बनाए रखने के लिए गर्म लापसी परोसी जाती है। हमारा उद्देश्य दुर्घटनाग्रस्त व बीमार गोवंश को रेस्क्यू कर अस्पताल लाना और उन्हें दर्दमुक्त जीवन देना है।दिन में दो बार अलग से पौष्टिक आहार दिया जाता है, डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी रहती है। - आनन्द पुरोहित, महासचिव, श्री पथमेड़ा गो चिकित्सालय बाड़मेर