आज विश्व पर्यटन दिवस है। पर्यटन के महत्व और ऐतिहासिक, प्राकृतिक व सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। राजसमंद जिला भी पर्यटन की इन खूबियों को एक साथ समेटे हुए है। कुंभलगढ़ दुर्ग, हल्दीघाटी, नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर, कांकरोली द्वारकाधीश मंदिर, चारभुजा गढ़बोर और राजसमंद झील प्रमुख पर्यटन केंद्र हैं। कुंभलगढ़ दुर्ग की करीब 36 किमी लंबी परकोटा दीवार और महाराणा प्रताप की जन्मस्थली के रूप में खास पहचान है। 2017 में पहुंचे थे सबसे ज्यादा 4.56 लाख देशी: कुंभलगढ़ दुर्ग पर 2017 में सर्वाधिक 4.56 लाख देशी व 12,856 विदेशी पहुंचे। 2018 में 4.12 लाख देशी व 9,772 विदेशी आए। कोरोना के बाद 2021 में 2.85 लाख देशी व 4,063 विदेशी, 2022 में 3.62 लाख व 2,133, 2023 में 4.38 लाख व 6,565 और 2024 में 3.56 लाख व 6,168 पर्यटक पहुंचे। 2025 में 4 लाख देशी और करीब 5 हजार विदेशी पर्यटक आए। 2026 में सितंबर तक 2 लाख से अधिक देशी और 2,100 विदेशी पर्यटक पहुंच चुके हैं। इतिहासकार कुबेर सिंह सोलंकी के अनुसार, पर्यटकों को सही ऐतिहासिक जानकारी देने के लिए होटल स्टाफ को भी दुर्ग और क्षेत्र के इतिहास से परिचित कराने की पहल की जा रही है। कुंभलगढ़ में सालभर गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश सहित राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक पहुंचते हैं। मानसून और वीकेंड में करीब 60 होटल-रिसॉर्ट पर्यटकों से भर जाते हैं। जनवरी से मार्च 2026 के बीच कुंभलगढ़, नाथद्वारा, हल्दीघाटी और राजसमंद वाले अरावली पर्यटन सर्किट में 40 लाख 4 हजार 291 पर्यटक यात्राएं दर्ज हुईं। 2025 में राजस्थान में 2525.03 लाख यानी करीब 25.25 करोड़ घरेलू और 19.45 लाख विदेशी पर्यटक यात्राएं दर्ज हुईं। जनवरी-जून 2026 में प्रदेश में 10.92 करोड़ पर्यटक यात्राएं हुईं। आगे बढ़ेगा हेरिटेज-एडवेंचर पर्यटन: कुंभलगढ़ में बादल महल, नीलकंठ महादेव मंदिर, वेदी मंदिर, गोलेराव जैन मंदिर, वन्यजीव अभयारण्य, मामादेव और परशुराम महादेव प्रमुख स्थल हैं। जड़फा ट्रेकिंग पॉइंट भी आकर्षण है। कुंभलगढ़ महोत्सव और एडवेंचर टूरिज्म से पर्यटन का दायरा बढ़ रहा है। फोटो-अशोक सोनी