डूंगरपुर| किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई फलदार बगीचे की योजना जिले में अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में 80 हेक्टेयर में आम, नींबू, अमरूद और आंवले के बगीचे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था। सात माह बीतने के बाद अब तक 25 हेक्टेयर में ही बगीचे लग पाए हैं। यानी लक्ष्य का 31.25% ही पूरा हुआ है और 55 हेक्टेयर का लक्ष्य बाकी है। योजना में किसानों को इकाई लागत का 50% तक अनुदान देने का प्रावधान है। इसके बावजूद किसानों की अपेक्षित रुचि नहीं दिख रही। अब तक विकसित 25 हेक्टेयर में 23 हेक्टेयर आम और 2 हेक्टेयर आंवला के हैं। नींबू व अन्य फलदार पौधों के लिए किसानों की रुचि कम रही। अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र के लिए अनुदान दिया जाता है। पहले वर्ष में स्वीकृत राशि का 60% और दूसरे वर्ष में 40% भुगतान का प्रावधान है। दूसरे वर्ष का भुगतान पौधों के जीवित रहने से जुड़ा है। शुरुआती वर्षों के लिए आर्थिक संबल जरूरी भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष गोविंदराम पाटीदार ने कहा कि केवल अनुदान से किसानों को बागवानी के लिए तैयार करना पर्याप्त नहीं है। सरकार को पौधों के उत्पादन में आने तक किसानों को आर्थिक संबल देने और फल की बिक्री के लिए बाजार की व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे किसान बागवानी को लंबे समय की आय के विकल्प के रूप में अपना सकेंगे। फलदार पौधों से उत्पादन शुरू होने में समय लगता है। छोटे किसान हर सीजन में फसल से आय की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में कई किसान शुरुआती वर्षों के खर्च और आमदनी के अंतर को देखते हुए बगीचा लगाने से पीछे हट रहे हैं। जिले में बड़ी संख्या में किसानों के पास छोटी और अलग-अलग हिस्सों में बंटी जमीन है। बगीचे के लिए एक जगह पर्याप्त क्षेत्र जुटाना और लगातार देखभाल करना मुश्किल होता है। आम के लिए सामान्यतः 10×10 मीटर दूरी पर करीब 100 पौधे प्रति हेक्टेयर लगाए जाते हैं, जबकि नींबू के लिए 3×3 मीटर दूरी रखी जाती है। इसके अलावा खाद, पौध संरक्षण और अन्य सामग्री की जरूरत होती है।