हनुमानगढ़ में निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल के खिलाफ पुराने जमीन विवाद से जुड़े मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। वकील हरवंश सिंह चन्दी की शिकायत पर पुलिस जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार प्रथमदृष्टया अपराध बनना पाए जाने के बाद पुलिस उप अधीक्षक, हनुमानगढ़ वृत्त के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई। मामले में गणेशराज बंसल के खिलाफ आरोपों की जांच अब CID-CB करेगी। 1995 की नीलामी से जुड़े हैं तीन भूखंड शिकायतकर्ता वकील हरवंश सिंह चन्दी ने H-39, H-40 और H-41 नंबर के भूखंडों को लेकर शिकायत दी थी। शिकायत के मुताबिक, तीनों भूखंड 3 नवंबर 1995 को नीलामी में खरीदे गए थे। इनमें H-39 भूखंड चन्दी के नाम तथा H-40 और H-41 उनकी पत्नी सरणपाल कौर के नाम दर्ज थे। 2024 में रात के समय पहुंचने का आरोप शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2024 में गणेशराज बंसल कुछ लोगों के साथ रात के समय इन भूखंडों पर पहुंचे। इस दौरान चारदीवारी तोड़ने, कमरे का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश करने और धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। मामले में पुलिस ने शिकायतकर्ता चन्दी के साथ गवाह पवन कुमार और कन्हैया के बयान भी दर्ज किए। नगर परिषद से जुटाए दस्तावेज पुलिस ने मामले की जांच के दौरान नगर परिषद से भूखंडों से संबंधित रिकॉर्ड, आदेश-पत्र और अन्य दस्तावेज प्राप्त कर जांच में शामिल किए। उपलब्ध दस्तावेजों और बयानों के आधार पर पुलिस ने मामले में प्रथमदृष्टया अपराध बनना पाया। BNS की इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला पुलिस जांच रिपोर्ट के अनुसार गणेशराज बंसल के खिलाफ BNS 2023 की धाराओं 308(2), 329(4), 331(6), 324(4), 324(5), 191(2), 191(3) और 190 के तहत अपराध घटित होना प्रथमदृष्टया पाया गया। इसके बाद पुलिस उप अधीक्षक, हनुमानगढ़ वृत्त की ओर से प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए गए और एफआईआर दर्ज की गई। विधायक के खिलाफ मामला, अब CID-CB करेगी जांच पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, प्रकरण में वर्तमान विधायक के खिलाफ आरोप होने के कारण विभागीय प्रावधानों के तहत अनुसंधान CID-CB से करवाया जाएगा। एफआईआर दर्ज होने के बाद मूल रिपोर्ट और एफआईआर की प्रति अनुसंधान के लिए पुलिस अधीक्षक हनुमानगढ़ के माध्यम से CID-CB जयपुर भेजने की प्रक्रिया बताई गई है। जांच में सामने आएंगे आरोपों के तथ्य एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी जांच का विषय है। पुलिस के अनुसार मामले में आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और अनुसंधान के आधार पर तय होगी।