त्रिपुरा कॉलोनी में इस्कॉन की ओर से आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में वृन्दावन से आए ब्रह्मचारी आचार्य द्विज राज प्रभु ने कहा कि यहां कौन स्थाई है, काल अपने ग्रास के लिए सबके पीछे लगा रहता है। महाभारत काल की सभी प्रगति को देखकर भी विदुर संतुष्ट नहीं थे। धृतराष्ट्र से बोले समस्त संग्रहों का अंत उनके क्षय में ही है। उन्होंने विश्व हरि नाम भागवतम् महोत्सव का वागड़ के तीन दिवसीय दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि कृष्ण भगवद्गीता में कहते हैं जन्म और मृत्यु का कारण मैं ही हूं। मृत्युः सर्व-हरश्च अहम्। अपराधियों, दुष्टों और राक्षसों के लिए मैं मृत्यु हूं। मैं सब कुछ छीन लेता हूूं। उन्होंने भक्त और अन्य लोगों की मृत्यु का विवेचन करते हुए कहा कि बिल्ली अपने मुंह में चूहे और अपने बच्चे को जिस तरह अलग-अलग पकड़ती है उसी तरह में काल बन मृत्यु का कारण बनता हूं। अपने भक्तों के जीवन-मरण के खेल को समाप्त कर अपने धाम मोक्ष प्राप्ति सहज सुलभ करवाता हूं। भौतिक उन्नतियों का अंत उनके पतन में ही है। सारे संयोगों का अंत वियोग में ही है। इसी तरह सम्पूर्ण जीव का अंत उसके निधन में ही सुनिश्चित है। उन्होंने बताया कि श्री कृष्ण का आना एक युग को सार्थक कर जाना है, एक सभ्यता का पुनरुत्थान कर जाना है। इस जीवन यात्रा में मर्यादा सिखानी होती है तो कभी परिहास में भोली-भाली गोपियों के वस्त्र भी चुराते हैं तो कभी जरासंध की जंघा भी चिरवाते हैं। सबकुछ होते हुए भी माखन की चोरी मात्र इसलिए करते हैं ताकि किसी के अधरों पर मुस्कान आए। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण का चरित्र ऊपर से देखने में चाहे जितना भी जटिल लगे, पर सत्य है कि स्वयं में इसका कण मात्र भी उतर जाए तो जीवन में सहजता के सिवा कुछ ना बचे। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान में निमेष भट्ट, आचार्य अभय गौरांग दास, अभिनंदन निमाई, कुशाग्र निमाई दास, शाबुनी मंडल, दीपिका, विभा, अर्चना, अनिता, भारती, चैतन्य, खुशी त्रिवेदी, रचना अरुण व्यास, शिल्पा, शुभम आदि ने अभिषेक पूजा विधान माल्यार्पण में भाग लेकर तुलसी नृसिंह कवच आरती विधान किया। इससे पूर्व यजमान परिवार ने भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण, राधा रानी, गौर निताई, चैतन्य महाप्रभु, गुरु श्रील प्रभुपाद की पूजा विधान माल्यार्पण श्रीफल भेंट करके की और गीता भागवत की पूजा विधान से पूर्ण होने पर भागवतम् महोत्सव की शुरुआत हुई। इस अवसर पर कृष्ण भावनामृत भक्ति साधना युक्त भजनों व गरबों पर देर तक साधक-साधिकाएं श्रद्धालु झूमते रहे।