एक महीने के अंदर दूसरी बार राजस्थान हाईकोर्ट छुट्‌टी के दिन खुला। हाईकोर्ट ने आज (रविवार) एक विशेष अवकाशकालीन सुनवाई करते हुए बाड़मेर जिला परिषद चुनाव से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा- जब चुनाव प्रक्रिया अपनी पूरी गति पर हो, तब उच्च न्यायालय को अनुच्छेद 226 के तहत ऐसा कोई आदेश पारित करने से बचना चाहिए जिससे चुनाव प्रक्रिया में रुकावट या देरी आए। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। आज सिर्फ इसी मामले की सुनवाई हुई। इससे पहले निकाय चुनावों को लेकर संडे के दिन 20 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने सुनवाई की थी। याचिकाकर्ता की दलीलें याचिकाकर्ता आवड़ दान ने बाड़मेर जिला परिषद के वार्ड संख्या 35 से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। उनका आरोप था कि रिटर्निंग अधिकारी ने बिना किसी ठोस कारण और उचित सुनवाई का अवसर दिए उनका नामांकन पत्र अवैध रूप से खारिज कर दिया। उन्हें इस बात की जानकारी 15 अक्टूबर को अखबार के माध्यम से मिली थी। मामले में राज्य सरकार और चुनाव आयोग के वकीलों ने दलील दी कि राजस्थान पंचायती राज (चुनाव) नियम-1994 के नियम 80(c) के तहत, नामांकन पत्र के अनुचित अस्वीकरण के खिलाफ जिला न्यायाधीश के समक्ष चुनाव याचिका दायर करने का वैधानिक प्रावधान मौजूद है। चुनाव परिणाम के बाद 30 दिन में कानूनी विकल्प उपलब्ध ​सुनवाई के दौरान न्यायाधीश डॉ. नूपुर भाटी ने सर्वोच्च न्यायालय के कई ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा- चूंकि याचिकाकर्ता के पास चुनाव परिणाम आने के बाद 30 दिन में चुनाव याचिका दायर करने का प्रभावी वैकल्पिक कानूनी विकल्प उपलब्ध है, इसलिए अदालत ने इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। यह खबर भी पढ़ें... इतिहास में पहली बार रात में खुला राजस्थान हाईकोर्ट:रात 10 से शुरू हुई सुनवाई, रात 2 बजे फैसला; पार्षदों की गिरफ्तारी पर रोक राजस्थान हाईकोर्ट ने इतिहास में संभवत: पहली बार रात में सुनवाई हुई थी। पार्षदों की गिरफ्तारी के मामले में 20 सितंबर की रात 2 बजे तक हुइ सुनवाई में कोर्ट ने हनुमानगढ़ के 9 और बीकानेर के एक पार्षद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। (पूरी खबर पढ़ें)