राजस्थान की लोक संस्कृति और लोक संगीत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग पहचान बनाने जा रहे हैं। स्विजरलैंड के प्रमुख सार्वजनिक सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल फोयर दु वले के 66 साल के इतिहास में पहली बार भारत को गेस्ट ऑफ ऑनर यानी सम्मानित अतिथि देश के रूप में चुना गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर राजस्थान के लोक कलाकार और तबला वादक रहीस भारती का अंतरराष्ट्रीय लोक संगीत एवं नृत्य समूह ‘धोद’ भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। स्विजरलैंड के मार्टिग्नी शहर में 2 से 11 अक्टूबर तक होने वाले इस महोत्सव में करीब ढाई लाख दर्शकों के पहुंचने का अनुमान है। ‘धोद’ समूह के कलाकार खास तौर पर राजस्थान की लोक संस्कृति, लोक संगीत और पारंपरिक नृत्य की झलक विदेशी दर्शकों के सामने पेश करेंगे। राजस्थान की मिट्टी, सुर और नृत्य की होगी प्रस्तुति आयोजन में देश की सांस्कृतिक विविधता को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने रखने का अवसर मिलेगा। राजस्थान के लोक संगीत में लंगा-मांगणियार गायकी, कालबेलिया नृत्य, सपेरा परंपरा, तबला, ढोलक और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की विशिष्ट पहचान है। ‘धोद’ के कलाकार इन्हीं लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत करेंगे। 119 देशों में दी राजस्थानी लोक संगीत की प्रस्तुति रहीस भारती करीब 26 साल से राजस्थान की लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में ‘धोद’ समूह अब तक 119 देशों में प्रस्तुति दे चुका है। समूह की खास पहचान यह है कि उसने राजस्थान के दूर-दराज के गांवों और पारंपरिक लोक कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ने का काम किया है। रहीस भारती ने अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर पारंपरिक कलाकारों को खोजा और उन्हें विदेशों में प्रस्तुति के अवसर दिलाए। इससे ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले अनेक कलाकारों को न केवल अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, बल्कि उनके लिए रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर भी बने। ग्रामीण कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया ‘धोद’ की टीम में राजस्थान की अलग-अलग लोक परंपराओं से जुड़े कलाकार शामिल हैं। इनमें रहीस भारती, सुशीला कालबेलिया, अफरीदी भारती, मोरू सपेरा, मोइनुद्दीन खान, इकबाल खान, तनवर लाल, इमरान लंगा, अब्दुल सत्तार खान, मोहम्मद रमजान, जाकिर, अयूब और सिकंदर मिरासी सहित अन्य कलाकार शामिल हैं। इन कलाकारों की प्रस्तुतियों में राजस्थान के लोक संगीत और नृत्य की अलग-अलग शैलियों का समावेश रहता है। खास तौर पर कालबेलिया, लंगा-मांगणियार संगीत और पारंपरिक राजस्थानी वाद्ययंत्रों के जरिए राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। ‘नमस्ते फ्रांस’ से लेकर ब्रिटेन तक दे चुके हैं प्रस्तुति रहीस भारती और ‘धोद’ समूह इससे पहले भी कई बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत और राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर चुका है। समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आयोजित ‘नमस्ते फ्रांस’ कार्यक्रम में भी प्रस्तुति दी है। इसके अलावा समूह फ्रांस के राष्ट्रपति से जुड़े कार्यक्रमों और ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के डायमंड जुबली समारोह जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में भी अपनी कला प्रस्तुत कर चुका है।