विदेश से MBBS कर भारत लौटे राजस्थान के युवाओं के लिए इंटर्नशिप दोहरी चुनौती बन गई है। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 1150 मेडिकल छात्रों से निर्धारित अवधि की क्लिनिकल ट्रेनिंग और ड्यूटी कराई जा रही है, लेकिन इंटर्नशिप के दौरान स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा। नेशनल मेडिकल कमीशन और सुप्रीम कोर्ट सभी राज्यों को विदेश से MBBS कर लौटे छात्रों को स्टाइपेंड देने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद राजस्थान में भुगतान नहीं हो रहा। प्रदेश में सामान्य MBBS इंटर्न्स का बेसिक स्टाइपेंड 21700 रुपए है। वित्त विभाग ने फंड्स की कमी का हवाला देते हुए FMGs को स्टाइपेंड देने से मना किया है। वहीं, मेडिकल शिक्षा आयुक्त बीएल गोयल को 6 बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। पीड़ित डॉ. संजीत गढवाल, डॉ. राजेन्द्र चौधरी, डॉ. विकास और डॉ. रजत का कहना है कि वे चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर और मेडिकल शिक्षा सचिव गायत्री राठौड़ से स्टाइपेंड के लिए कई बार मिल चुके हैं। एनएमसी-सुप्रीम कोर्ट के निर्देश यूपी, एमपी, कर्नाटक, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, असम और जम्मू-कश्मीर में विदेश से MBBS करके आने वालों को हर महीने 20 से 30 हजार रुपए तक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। अब दिल्ली सरकार ने भी स्टाइपेंड देने का निर्णय लिया है। ऐसे में सवाल है कि जब देश के कई राज्यों में स्टाइपेंड का प्रावधान है, तो विदेश से पढ़ाई करके आने वाले इन युवाओं को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा?