राजस्थान पुलिस की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) के एडीजीपी दिनेश एमएन ने राज्य में बढ़ते साइबर क्राइम, नारकोटिक्स और पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हो रही ड्रग्स और हथियारों की तस्करी को पुलिस के लिए बड़ा चैलेंज बताया है। दिनेश एमएन ने बुधवार को अलवर के ठेकड़ा स्थित पुलिस परेड ट्रेनिंग स्कूल में पुलिस कांस्टेबल प्रशिक्षण के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि ये बता कहीं। उन्होंने पुलिसिंग, टीम वर्क और अपने 30 साल के सेवा अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने कहा- पुलिस में एक कॉन्स्टेबल से लेकर डीजीपी तक सब अफसर हैं। वीरप्पन ऑपरेशन हो या 10 साल पहले राजस्थान का रणपाल सिंह एनकाउंटर दोनों ही कॉन्स्टेबल और हेड कॉन्स्टेबल के कारण सफल हुए थे। आईटीबीपी के दीक्षांत समारोह की PHOTOS ड्रोन ड्रॉपिंग नया ट्रेंड, विदेश में बैठे आकाओं तक पहुंची पुलिस दिनेश एमएन ने कहा कि मौजूदा पुलिस के सामने पाकिस्तान सीमा से हीरोइन, ड्रग्स और हथियारों की ड्रोन से सप्लाई को रोकने की बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि सीमा पार से ड्रोन ड्रॉपिंग का यह नया ट्रेंड बीते 4-5 सालों में तेजी से बढ़ा है, जिस पर राजस्थान पुलिस, गंगानगर, बाड़मेर पुलिस और एटीएस मिलकर प्रभावी कार्रवाई कर रही हैं। न केवल लोकल नेटवर्क ध्वस्त किए गए हैं, बल्कि विदेश में बैठकर गैंग चलाने वालों को भी दबोचा गया है। कॉन्स्टेबल का रोल SHO और SP से कम नहीं दिनेश एमएन ने स्पष्ट किया कि किसी बड़े एनकाउंटर या ऑपरेशन में नाम भले ही किसी अधिकारी का सामने आए, लेकिन सफलता पूरी टीम की मेहनत का नतीजा होती है। पुलिस का मुख्य लक्ष्य ऐसा माहौल बनाना है जिससे अपराधी डरे और आम जनता दिन-रात खुद को महफूज महसूस करे। पुलिस में कॉन्स्टेबल से लेकर डीजीपी तक सभी ऑफिसर हैं और सभी को काम साबित करने का बराबर मौका मिलता है। उन्होंने याद दिलाया कि वीरप्पन ऑपरेशन हो या 10 साल पहले राजस्थान का रणपाल सिंह एनकाउंटर दोनों में ही कॉन्स्टेबल और हेड कॉन्स्टेबल की सूचना व सटीक कार्रवाई से ही ऑपरेशन सफल हुए थे। वर्दी सिर्फ नौकरी नहीं, आमजन की तकलीफ दूर करने का जरिया 30 साल की नौकरी का निचोड़ बताते हुए उन्होंने कहा कि वेतन, इज्जत और सुविधाओं से इतर सबसे बड़ी संतुष्टि किसी परिवादी की तकलीफ दूर करने और उसे सुरक्षा का अहसास कराने से मिलती है।