देवस्थान विभाग की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा के तहत जगन्नाथपुरी-कोणार्क यात्रा पर निकले 880 वरिष्ठ तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा खास रही। सभी यात्रियों ने मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारे लगाए। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। इस दौरान सभी यात्री मंदिर में होने वाले ध्वज परिवर्तन के भी साक्षी बने। जगन्नाथ मंदिर में दर्शन के दौरान बुजुर्गों के चेहरों पर अलग ही उत्साह नजर आया। दर्शन के बाद यात्रियों ने पुरी में खरीदारी की। साथ ही आसपास के प्रमुख धार्मिक एवं दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया। यात्रियों ने पुरी बीच पहुंचकर समुद्र की लहरों को निहारा। वहीं लोकनाथ मंदिर, चंदन तालाब और बेड़ी वाले हनुमानजी मंदिर के भी दर्शन किए। 700 साल पुरानी देखी धरोहर यात्रियों को जब चंद्रभागा बीच ले जाया गया। समुद्र किनारे पहुंचते ही बुजुर्गों में उत्साह नजर आया। चंद्रभागा बीच से यात्री कोणार्क सूर्य मंदिर पहुंचे। करीब 700 साल पुरानी यह ऐतिहासिक धरोहर भव्य स्थापत्य कला और बारीक शिल्प के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की विशाल संरचना, पत्थरों पर की नक्काशी और रथ के आकार की वास्तुकला देखकर वरिष्ठ तीर्थयात्री अभिभूत नजर आए। 3 अक्टूबर को हुए थे रवाना भुवनेश्वर स्थित लिंगराज मंदिर में यात्रियों ने भगवान शिव के दर्शन किए। लिंगराज मंदिर की भव्य स्थापत्य कला और कलिंग शैली की नक्काशी ने सभी को आकर्षित किया। लिंगराज मंदिर की धार्मिक मान्यता और स्थापत्य विरासत इसे विशेष बनाती है। यहां हरिहर स्वरूप की भी मान्यता है। मंदिर की ऊंची संरचना, पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और कलात्मक शिल्प देखकर यात्री मंत्रमुग्ध नजर आए। लिंगराज मंदिर में दर्शन के बाद सभी 880 वरिष्ठ तीर्थयात्री मालतीपाटपुर रेलवे स्टेशन से विशेष ट्रेन से उदयपुर के लिए रवाना हुए। सभी यात्री 8 अक्टूबर की रात तक उदयपुर पहुंचेंगे। जगन्नाथपुरी-कोणार्क यात्रा के लिए विशेष ट्रेन 3 अक्टूबर को उदयपुर के राणा प्रताप नगर रेलवे स्टेशन से रवाना हुई थी। उदयपुर संभाग के 780 वरिष्ठ तीर्थयात्री इसमें सवार हुए। इसके बाद कोटा से 100 और यात्री ट्रेन में शामिल हुए।