जागसा में रावल मल्लीनाथ जी के भव्य मंदिर सहित पांच मंदिरों के प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर निकाली जा रही निमंत्रण एवं जनसहयोग यात्रा बुधवार को जागसा गांव पहुंची। यहां क्षत्रिय समाज के सरदारों ने उत्साह के साथ यात्रा का स्वागत किया। इस दौरान मंदिर निर्माण के लिए कुल 42.17 लाख रुपए की आर्थिक सहयोग राशि देने की घोषणा की गई। यह यात्रा श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज और महंत श्री गणेशपुरी जी महाराज के मार्गदर्शन में निकाली जा रही है। इसका आयोजन श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा की ओर से किया जा रहा है। संस्थान के प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं। गोपड़ी से शुरू हुई यात्रा, 2 सितंबर 2027 को होगा महोत्सव संस्थान के सचिव सुमेर सिंह वरिया ने बताया कि रावल मल्लीनाथ जी सहित पांच मंदिरों का निर्माण कार्य चल रहा है। इन मंदिरों का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 2 सितंबर 2027 को आयोजित होना तय है। इस आयोजन में सर्व समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निमंत्रण एवं जनसहयोग यात्रा निकाली जा रही है। यात्रा शारदीय नवरात्र की बीज के अवसर पर रावल मल्लीनाथ जी की जन्मस्थली गोपड़ी से शुरू हुई थी। यात्रा के माध्यम से मालाणी क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पहुंचकर लोगों को महोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया जा रहा है और मंदिर निर्माण के लिए जनसहयोग जुटाया जा रहा है। जागसा में समाजबंधुओं ने की सहयोग राशि की घोषणा जागसा गांव में यात्रा के पहुंचने पर क्षत्रिय समाज के सरदारों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ स्वागत किया। इस दौरान समाज के विभिन्न परिवारों और सहयोगकर्ताओं ने मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की। घोषित राशि में बड़ी संख्या में परिवारों ने व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से योगदान देने की सहमति जताई। प्रमुख सहयोग घोषणाओं में मोहन सिंह एवं छतर सिंह सुपुत्रगण भीम सिंह की ओर से 5.51 लाख रुपए, स्वरूप सिंह, डूंगर सिंह, राम सिंह, समुद्र सिंह एवं समस्त खुमाण सिंह परिवार की ओर से 5.21 लाख रुपए तथा चंदन सिंह सुपुत्र शिवनाथ सिंह की ओर से 3.51 लाख रुपए शामिल हैं। वहीं शैतान सिंह सुपुत्र जब्बर सिंह, बाघ सिंह सुपुत्र मोती सिंह, चंदन सिंह सुपुत्र शिवनाथ सिंह, प्रेम सिंह, डूंगरसिंह, जोग सिंह, भवानी सिंह एवं विजयपाल सिंह सुपुत्रगण बलवंत सिंह, धर्म सिंह एवं मुकन सिंह सुपुत्रगण रिडमल सिंह, स्वरूप सिंह, डूंगर सिंह, राम सिंह, समुद्र सिंह एवं समस्त खुमाण सिंह के परिवार, भीख सिंह सुपुत्र सूर सिंह, मोहनसिंह एवं छत्तर सिंह सुपुत्रगण हुकम सिंह, रूप सिंह सुपुत्र अमर सिंह, रतन सिंह सुपुत्र सूर सिंह, अनोप सिंह एवं देवी सिंह सुपुत्रगण धन सिंह तथा माधव सिंह एवं जेठूसिंह सुपुत्रगण आसु सिंह, धन सिंह, राजू सिंह एवं देवी सिंह सुपुत्रगण मोहबत सिंह, मेघ सिंह एवं विरसिंह सुपुत्रगण छैल सिंह तथा लक्ष्मण सिंह, श्रवण सिंह, गजे सिंह, माधु सिंह एवं वीर सिंह, मोहन सिंह एवं जालम सिंह सुपुत्रगण वेरियाल सिंह, प्रेम सिंह सुपुत्र आम्ब सिंह तथा करण सिंह, रघुवीर सिंह एवं जालम सिंह, खीम सिंह एवं भूरसिंह, कान सिंह एवं राण सिंह, मनोहर सिंह एवं अर्जुन सिंह तथा मेताब सिंह सुपुत्र लाख सिंह, जब्बर सिंह सुपुत्र जैत सिंह तथा वीर सिंह सुपुत्र लाख सिंह, स्वरूप सिंह, मनोहर सिंह एवं राम सिंह, मांग सिंह सुपुत्र चैन सिंह, महेंद्र सिंह एवं मेहताब सिंह सुपुत्रगण फूफ सिंह, मांग सिंह एवं कान सिंह सुपुत्रगण हुकम सिंह, लाख सिंह सुपुत्र किशन सिंह, जैत सिंह सुपुत्र तेज सिंह, मनोहर सिंह, सवाई सिंह एवं पर्बत सिंह सुपुत्रगण अखे सिंह, ईश्वर सिंह, प्रयाग सिंह, प्रेम सिंह एवं धन सिंह सुपुत्रगण दीप सिंह, जूठ सिंह सुपुत्र कोजराज सिंह, महेंद्र सिंह, मूल सिंह एवं छोटू सिंह सुपुत्रगण रतन सिंह, भगवान सिंह सुपुत्र नरपत सिंह, डूंगर सिंह सुपुत्र कोजराज सिंह, ओख सिंह एवं कान सिंह सुपुत्रगण खंगार सिंह, दीप सिंह सुपुत्र बुलदान सिंह, मोहन सिंह एवं छतर सिंह सुपुत्रगण भीम सिंह, पदम सिंह सुपुत्र भीम सिंह, भगवान सिंह एवं हनुमान सिंह सुपुत्रगण इंद्र सिंह तथा रतन सिंह एवं मदन सिंह सुपुत्रगण मोती सिंह समेत कई समाजजनों ने आर्थिक सहयोग किया। इसके अलावा भीख सिंह सुपुत्र सूर सिंह, भगवान सिंह सुपुत्र नरपत सिंह, प्रेम सिंह, डूंगरसिंह, जोग सिंह, भवानी सिंह एवं विजयपाल सिंह सुपुत्रगण बलवंत सिंह तथा स्वरूप सिंह, मनोहर सिंह एवं राम सिंह की ओर से 2.21 लाख रुपए की सहयोग राशि घोषित की गई। अन्य सहयोगकर्ताओं ने भी अपनी श्रद्धानुसार आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की। धार्मिक विरासत के संरक्षण का प्रयास संस्थान के प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने सभी सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी मालाणी की धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने कहा कि पंच मंदिरों का निर्माण मालाणी की गौरवशाली धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। इसके माध्यम से श्री रावल मल्लीनाथ जी के शौर्य, पराक्रम, धर्मनिष्ठा और लोककल्याणकारी आदर्शों को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का उद्देश्य है। उन्होंने श्री राणी रूपादे जी की भक्ति, समानता, सामाजिक समरसता और मानव सेवा की प्रेरणादायी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परंपरा समाज को एकता और सद्भाव का संदेश देती है। साथ ही, उन्होंने क्षत्रिय समाज के सरदारों की श्रद्धा और उदार जनसहयोग की सराहना की। सर्व समाज से सहभागिता की अपील कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने सर्व समाज से प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में अधिकाधिक संख्या में शामिल होने और तन, मन एवं धन से सहयोग करने का आह्वान किया। निमंत्रण एवं जनसहयोग यात्रा आगामी दिनों में मालाणी क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पहुंचेगी। इस दौरान सर्व समाज के लोगों को पंच मंदिरों के प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में सपरिवार शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा।