जयपुर में दुर्गापुरा के आंच हॉस्पिटल में डेड बॉडी बदलने का मामला सामने आया है। अस्पताल में दो मरीजों की मौत हो गई थी, लेकिन स्टाफ ने किसी दूसरे की डेडबॉडी दूसरे मृतक के परिजनों को सौंप दी। गिरधारी के परिजन शव को लेकर अस्पताल से करीब 20 किलोमीटर दूर निकल गए थे, तभी अस्पताल प्रशासन ने गलती का पता चलने पर गिरधारी के परिजनों को वापस बुलाया। इस पर परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ आज सुबह करीब 2 घंटे धरना दिया। मामला जवाहर सर्किल थाना क्षेत्र में SL मार्ग स्थित हॉस्पिटल का है। मृतक गिरधारी के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने उन्हें जिस व्यक्ति की डेडबॉडी सौंपी, वह गिरधारी की नहीं थी। वहीं घेसाराम के परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर दावा किया कि जो शव उन्हें दिखाया गया, वह घेसाराम का है, जबकि घेसाराम ICU में भर्ती था और उसका इलाज चल रहा था। गिरधारी के परिजनों की ओर से अस्पताल के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज करवाया गया। परिजनों ने धरना देकर अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की भी मांग की। इस दौरान मौके पर पुलिस और निजी अस्पताल डॉक्टर एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. राजवीर सिंह मौके पर पहुंचे और परिजनों व हॉस्पिटल प्रशासन से बात की। इस दौरान अस्पताल ने अपनी गलती स्वीकार कर इसे इंसानी भूल बताया और गलत मंशा से इनकार किया। जवाहर सर्किल थानाधिकारी मुकेश चंद ने बताया कि आंच हॉस्पिटल में दो पेशेंट भर्ती हुए थे। नागौर, नावां निवासीे गिरधारी लाल और अलवर निवासी घेसालाल। इनकी रात को मौत हो गई थी। स्टाफ ने बानसूर निवासी घेसाराम की डेडबॉडी नावां निवासी गिरधारी के परिजनों को सौंप दी थी। हॉस्पिटल प्रशासन को जब पता चला तो इनके परिजनों को वापस फोन करके जानकारी दी। इसके बाद मृतक के परिजन वापस हॉस्पिटल आए। मृतकों के परिजनों ने हॉस्पिटल के खिलाफ और डॉक्टरों के खिलाफ लापरवाही की शिकायत दी। इसके संबंध में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। शवों का जयपुरिया हॉस्पिटल में पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। मामले में जांच के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी। शव देखने के बाद हुआ शक परिजनों के मुताबिक, वे डेडबॉडी लेकर जयपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर पहुंच चुके थे। रास्ते में शव देखने पर उन्हें शक हुआ। पहचान करने पर सामने आया कि शव गिरधारी का नहीं है। इसके बाद उन्होंने अस्पताल से संपर्क किया और दूसरे मृतक के परिजनों को भी मामले की जानकारी मिली। इसके बाद घेसाराम के परिजन अस्पताल पहुंचे। उनका कहना था कि अस्पताल में घेसाराम ICU में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है। इस दावे के बाद अस्पताल की मरीज पहचान और रिकॉर्ड व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए। परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप मामले में गिरधारी के परिजनों ने करीब 2 घंटे सुबह 8.20 से करीब 10.25 तक धरना दिया था। बाद में मांगों पर सहमति बनने के बाद धरना समाप्त किया गया। गिरधारी के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर डेडबॉडी बदलने और इलाज के नाम पर पैसे वसूलने के लिए मृत व्यक्ति का इलाज जारी रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। परिजनों ने की थी कि मामले की जांच कर अस्पताल का लाइसेंस रद्द किया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मृतक गिरधारी के भांजे ने अस्पताल प्रशासन पर लगाए आरोप रमेश चौधरी लाड़नू ने बताया कि हमारे मौसा जी गिरधारी लाल 17 तारीख से इस हॉस्पिटल के आईसीयू में एडमीट थे। वे वेंटिलेटर पर थे, हम बराबर इस मामले में डॉक्टरों से बात कर रहे थे। जैसे ही हमने पेशेंट से मिलने पर जोर दिया तो डॉक्टर्स पेशेंट से मिलने नहीं दे रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी डेथ तो दो दिन पहले ही हो गई थी। लेकिन हॉस्पिटल वाले इलाज का नाटक कर रहे थे। हमने डिस्चार्ज करने का दबाव बनाया। जैसे ही हम कालवाड़ से आगे निकले तो हॉस्पिटल से बॉडी चेंज होने का फोन आया। रमेश ने कहा कि हमने आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनिवाल को फोन कर जानकारी दी, उनके कहने पर मुकदमा दर्ज हुआ वरना हमारी तो सुन भी नहीं रहे थे।
पुलिस जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर अब जांच का सबसे अहम बिंदु यह है कि दोनों मरीजों की पहचान में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। डेडबॉडी सौंपने से पहले मरीज की पहचान, अस्पताल रिकॉर्ड और परिजनों के दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया, इसकी भी जांच होगी। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि ICU में भर्ती बताए जा रहे घेसाराम की वास्तविक स्थिति क्या थी और अस्पताल के रिकॉर्ड में दोनों मरीजों की मौत से जुड़ी एंट्री कब और कैसे की गई। पुलिस अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, ICU रिकॉर्ड, डेथ रिकॉर्ड, डेडबॉडी हैंडओवर से जुड़े दस्तावेज और CCTV फुटेज की जांच कर सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह मामला मानवीय भूल का था या इसके पीछे किसी स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई। --- ये खबर भी पढ़ें… SMS हॉस्पिटल से बिना बताए शव को बाहर लाए परिजन:स्ट्रेचर पर रखकर ले जा रहे थे; पुलिस के रोकने पर 20 मिनट किया हंगामा जयपुर के SMS हॉस्पिटल से बिना परमिशन एक युवक के शव को लेकर जा रहे परिजनों को पुलिस ने पकड़ लिया। पतंग उड़ाते समय छत से गिरने पर युवक को हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। युवक की मौत के बाद स्टाफ को बिना बताए परिजन स्ट्रेचर पर शव हॉस्पिटल से बाहर ले आए। (पूरी खबर पढ़ें)