रंग-बिरंगे कपड़ों पर पारंपरिक कढ़ाई, हाथों से बुने टेक्सटाइल्स की बारीकियां, आभूषणों की चमक और घर को खास अंदाज देने वाले हस्तनिर्मित उत्पाद। एक ही छत के नीचे देश के अलग-अलग हिस्सों की कला और शिल्प परंपराओं के ऐसे ही रंग बिड़ला ऑडिटोरियम के म्यूजियम हॉल में देखने को मिल रहे हैं। यहां मंगलवार को शिल्पकारी के तीन दिवसीय ‘फेस्टिव एडिट 2026’ का शुभारंभ हुआ। भारतीय हस्तशिल्प और हैंडलूम की विविधता को समेटे इस प्रदर्शनी में खरीदारी के साथ संगीत, खान-पान और डांडिया का भी इंतजाम किया गया है। पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग की सचिव मुख्य अतिथि शुचि त्यागी ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर इटरनल अस्पताल की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मंजू शर्मा और डिजाइनर-उद्यमी स्वाति उबरोई विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। मेडिटेशन एक्सपर्ट व यज्ञाचार्या निर्मला सेवानी ने मंत्रोच्चारण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। प्रदर्शनी 15 अक्टूबर तक सुबह 11 से रात 8 बजे तक खुली रहेगी। यहां देखिए इवेंट के फोटो… भारतीय टेक्सटाइल्स की विविधता कर रही आकर्षित प्रदर्शनी में बनारसी कपड़ों की पारंपरिक बुनाई है तो कहीं चंदेरी की खास पहचान। भुजोड़ी, बांधनी, पटोला, बालूचरी, अजरख, चिकनकारी, फुलकारी, जामदानी, कांथा और कसूती जैसे शिल्पों के उत्पाद भी यहां प्रदर्शित किए गए हैं। मधुबनी कला, शिबोरी, ओडिशा इकत, कलमकारी, सिंधी एवं सूफ कढ़ाई और पूर्वोत्तर भारत के टेक्सटाइल्स भी इस विविधता का हिस्सा हैं। इन शिल्पों की खासियत उनके पीछे छिपी पारंपरिक तकनीकों और कारीगरों की मेहनत में है। अलग-अलग क्षेत्रों की बुनाई, रंगाई और कढ़ाई की शैलियां भारतीय हस्तकला की समृद्ध परंपरा को सामने लाती हैं। प्रदर्शनी में आने वाले लोग इन उत्पादों को करीब से देखने के साथ अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी भी कर सकते हैं। बस्तर आर्ट से अफगान ज्वैलरी कर रही अट्रेक्ट टेक्सटाइल्स के अलावा प्रदर्शनी में हस्तनिर्मित उत्पादों की भी कई श्रेणियां शामिल हैं। बस्तर आर्ट, बांस शिल्प, हाथ से पेंट किए गए सिल्क उत्पाद, खादी, कारपेट्स, दरियां और कॉपर बेल्स के साथ अफगान ज्वैलरी भी आकर्षण का केंद्र हैं। ज्वैलरी, फेस्टिव फैशन और होम डेकोर के उत्पादों के जरिए यहां पारंपरिक शिल्प को समकालीन जरूरतों और डिजाइन के साथ प्रस्तुत किया गया है। शुचि त्यागी ने कहा- पारंपरिक कलाओं को जीवित रखने के लिए उन्हें लगातार प्रोत्साहन और बाजार उपलब्ध कराना जरूरी है। इस तरह के मंच कारीगरों को पहचान दिलाने के साथ लोगों को हस्तनिर्मित उत्पादों की विशेषताओं से भी परिचित कराते हैं। शिल्पकारी की संस्थापक शिल्पी भार्गव ने बताया कि मंच का उद्देश्य भारतीय शिल्प को उसकी परंपराओं और कहानियों के साथ लोगों तक पहुंचाना है। आयोजन के दौरान एक शाम डांडिया और दो शाम लाइव म्यूजिकल परफॉर्मेंस होंगी। फूड फेस्टिवल भी आयोजन का अहम आकर्षण है। इसमें जयपुर के फूड ब्रांड्स 90 बटा 3, बर्गर फार्म, प्रोजेक्ट भटूरा, रोस्टवे, मनीषा’ज ड्रीमरी, किंग्स कुल्फी और फूडआउल शामिल हैं।