राजधानी जयपुर एजेंसियों को चकमा देने वाले विदेशियों की शरण स्थली बनती जा रही है। पिछले 7 महीने में वीजा खत्म होने के बावजूद अवैध तरीके से रह रहे 36 विदेशी पकड़ में आ चुके हैं। इनमें थाईलैंड की 19 लड़कियां, युगांडा और तंजानियां की 14 लड़कियां भी शामिल हैं, जिन्हें स्पा सेंटर्स और होटलों में छापेमारी के दौरान पकड़ा गया। हैरानी की बात ये है कि एक युवती पिछले 12 साल से बिना वीजा के छिपकर रह रही थी। कई युवितयों के पास भारतीय पहचान पत्रों से खरीदी गई मोबाइल सिम भी मिली हैं। अधिकारियों के मुताबिक सभी युवतियों को एजेंटों के जरिए यहां लाया गया था। अब इनको यहां लाने और मदद करने वाले नेटवर्क की पड़ताल की जाएगी। पढ़िए- पूरी रिपोर्ट… टूरिस्ट वीजा पर आए, लेकिन लौटे नहीं विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRO) धर्मेंद्र सागर ने बताया कि जनवरी से जुलाई के बीच 35 ऐसे विदेशी नागरिक थे, जो जयपुर एयरपोर्ट पर उतरे। इन सबके पास टूरिस्ट यानी घूमने का वीजा था। लेकिन कोई भी वीजा खत्म होने पर अपने देश नहीं लौटा। विदेश मंत्रालय से लिस्ट मिलने के बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया। स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस की मदद से कई होटलों और स्पा सेंटर्स पर दबिश दी गई। इस दौरान पकड़ में आए सभी 36 विदेशियों को कानूनी तरीके से डिपोर्ट कर दिया गया। डिपोर्ट किए गए 36 विदेशियों में सबसे अधिक 19 युवतियां थाईलैंड और 14 युवतियां युगांडा, तनजानियां, उजबेगिस्तान, केन्या की मिलीं। इसके अलावा केन्या के 3 युवक भी शामिल थे। 12 साल तक चकमा देती रही युवती सर्च ऑपरेशन के दौरान सामने आया कि युगांडा की एक युवती पिछले 12 साल से छिपकर रह रही थीं। युवती वर्ष 2013 दिसंबर में टूरिस्ट वीजा पर जयपुर आई थी। जयपुर के बाद चंड़ीगढ़, बेंगलुरू, हैदराबाद से लेकर अलग-अलग राज्यों में अवैध मसाज सेंटरों से लेकर कई होटलों में काम किया। थाई महिला के बयान से खुला नया एंगल जुलाई माह में जयपुर के निर्माण नगर में एक होटल से थाई महिला को रिकवर किया गया था। महिला मार्च में ही टूरिस्ट वीजा लेकर जयपुर आई थी। उसके पास जून 2026 तक भारत में रहने का वीजा था। लेकिन वो पिछले डेढ़ महीने से छिपकर रही थीं। पकड़े जाने पर महिला ने बताया कि वो स्थानीय लोगों की मदद से स्पा में काम कर रही थी, जो उसके वीजा की शर्तों के अनुसार नहीं था। किसी के खिलाफ मुकदमा, किसी पर देह व्यापार की आशंका सागर ने बताया- कुछ विदेशी ऐसे भी थे, जिनके खिलाफ केस चल रहे थे। केन्या के युवक पर चोरी का मामला दर्ज था। ऐसे नागिरकों को कोर्ट के आदेश पर वीजा बढ़ाकर रोका जाता है। बाद में केस निस्तारण होने पर डिपोर्ट कर दिया जाता है। विदेश मंत्रालय ऐसे विदेशियों को ब्लैक लिस्ट कर देता है। कार्रवाई के दौरान पकड़ में आई कई युवतियों के देह व्यापार में शामिल होने की आशंका थी। पीटा (अनैतिक व्यापार अधिनियम) एक्ट में संशोधन के कारण इन युवतियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती है। वीजा खत्म होने के मामले में एक्शन लेते हुए इन को डिपोर्ट किया जाता है। जयपुर आते ही एजेंट ले लेता है पासपोर्ट-वीजा धर्मेन्द्र सागर ने बताया- अबतक टीम की पकड़ में आई विदेशी युवतियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ये ट्रेवल एजेंट के जरिए ट्यूरिस्ट और ई-वीजा से भारत आती हैं। विदेशी ट्रेवल एजेंट भारतीय एजेंटों के साथ पैसों में डील करते हैं। यहां आने के बाद स्थानीय एजेंट इनका पासपोर्ट जब्त कर लेते हैं। ताकि पूरा कंट्रोल इनके पास रहे। इसके बादा स्पा और अन्य अवैध गतिविधियों में लगा देते हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक एजेंट पासपोर्ट तब तक अपने पास रखते हैं, जब तक डील के अनुसार कमाई के टारगेट पूरे नहीं हो जाते। ऐसे में थाइलेंड से लाई गई युवतियां वीजा एक्सपायर होने के बावजूद जगह बदल- बदल कर रहती हैं। पासपोर्ट मिलने के बाद भी यहीं शिफ्ट होकर काम करने लगती हैं। स्पा, मसाज सेंटरों में नौकरी का झांसा एफआरओ धर्मेन्द सागर ने बताया कि एजेंट ज्यादातर थाईलैंड से युवतियों को स्पा और मसाज सेंटरों पर नौकरी के नाम पर बुलाते हैं। कई युवतियां वीजा खत्म होने के बाद और अधिक पैसा कमाने के लिए अवैध रूप से जयपुर में रुक जाती हैं। विदेश मंत्रालय की सूचना पर पूर्व में पकड़ी गई लड़िकयों से पूछताछ में इनके बारे में पता लग पाता है। जिस के बाद एजेंसी अपनी टीम के साथ दबिश देकर इन को पकड़ती हैं। वीजा खत्म होते ही ई-सिम बंद, इसलिए ट्रेस करना मुश्किल सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि अवैध रूप से रहने वाले विदेशी आखिर क्यों आसानी से पकड़े नहीं जाते? इस सवाल के जवाब में धर्मेंद्र सागर बताते हैं- विदेशी नागरिक जब ई-वीजा या ट्यूरिस्ट वीजा पर भारत घूमने आता है तो उसे एयरपोर्ट पर एक ई-सिम जारी होती है। उस सिम का इस्तेमाल वह वीजा की अंतिम तारीख तक ही कर सकता है। वीजा अवधि जिस दिन खत्म होगी, ई-सिम अपने आप बंद हो जाएगी। सिम बंद होते ही अवैध तरीके से देश में रुकने वाले विदेशियों को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। कई विदेशी स्थानीलय लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से सिम खरीद लेते हैं। उन सिम के जरिए ही ये सभी आपस में कॉन्टैक्ट में रहते हैं।