बीजेपी ने सुनील कोठारी को जयपुर नगर निगम से मेयर का प्रत्याशी बनाया है। सुनील कोठारी का मेयर बनना उनके टिकट मिलने के साथ ही लगभग तय हो गया था। लेकिन अंतिम समय में एकबार उनका नाम अटक गया था। जयपुर नगर निगम के दो वार्डों में री-पोलिंग होने से जयपुर नगर निगम में मेयर का चुनाव अन्य निकायों से बाद में हुआ। ऐसे में पार्टी उदयपुर में जैन समुदाय से पारस सिंघवी को मेयर प्रत्याशी बना चुकी थी। जैन होने के कारण अटका नाम वहीं, जयपुर में नाम तय होने से पहले पार्टी ने जोधपुर में प्रसन्न मेहता को अपना प्रत्याशी बना दिया था। यह भी जैन समुदाय से आते हैं। ऐसे में जो नाम शुरू से जयपुर मेयर के लिए पार्टी की पसंद था, वह एक बार के लिए अटक गया था। लेकिन सीएम भजनलाल शर्मा, प्रदेश नेतृत्व और संघ की पसंद के चलते सामाजिक समीकरण खिलाफ होने पर भी सुनील कोठारी ही पहली पसंद बने रहे। इतिहास ने दिया कोठारी का साथ जब मामला इस बात पर अटका कि उदयपुर और जोधपुर के बाद भी क्या पार्टी को जयपुर में भी जैन समुदाय से ही प्रत्याशी बनाना चाहिए। उस समय सुनील कोठारी की किस्मत को इतिहास का भी साथ मिला। ठीक इस तरह की स्थिति बीजेपी में पहले भी हो चुकी है। उस समय भाजपा में निर्मल नाहटा जयपुर के मेयर और चंद्रसिंह कोठारी उदयपुर के मेयर थे। दोनों जैन समुदाय से आते हैं। पूर्व बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने लिखी पूरी पटकथा दरअसल, सुनील कोठारी के मेयर बनने की पूरी पटकथा करीब 6 महीने पहले ही लिखी जा चुकी थी। बीजेपी के एक पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, जो संघ के बेहद करीब माने जाते है। उन्होने सुनील कोठारी को टिकट दिलाने से लेकर मेयर बनाने में अहम भूमिका निभाई। बताते है कि उन्हीं के कारण संघ ने सुनील कोठारी को सीएमआर में कॉर्डिनेटर के तौर पर लगाया था। कोठारी पिछले कुछ महीने से संघ और सरकार के बीच समन्वय का काम देख रहे थे। ऐसे में सीएम और संघ उनकी कार्यशैली से प्रभावित थे। निकाय चुनाव की घोषणा के बाद जब कोठारी को चुनाव लड़ाना तय हुआ तो उनके मेयर बनने तक के सफर की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं नेता ने संभाली। उन्होने सत्ता, संगठन और संघ को सुनील कोठारी के नाम पर एक मंच पर लाने में अहम भूमिका निभाई। ये भी पढ़ें… जयपुर में बीजेपी से सुनील कोठारी मेयर प्रत्याशी:पूर्व भाजपा शहर अध्यक्ष रह चुके; कांग्रेस से 3 प्रत्याशियों ने भरा नॉमिनेशन फॉर्म