नशे की लत का इलाज अब एसएसएस हॉस्पिटल में फ्री होगा। इसके लिए आईपीडी फैसेलिटी शुरू की गई है। जो एसएमएस मेडिकल कॉलेज के अधीन मनोचिकित्सा केन्द्र के अंतर्गत शुरू की गई है। यहां नशे की लत को छुड़वाने के लिए 10 बैड की व्यवस्था की गई है, लेकिन आने वाले समय में इन बैड की संख्या को और बढ़ाया जाएगा। नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (NDDTC) के अंतर्गत ये सेवाएं शुरू की गई हैं। यहीं से मरीजों के लिए दवाइयां और जरूरी सामान्य दिए जा रहे हैं। मनोचिकित्सा केन्द्र जयपुर के अधीक्षक डॉक्टर योगेश सतीजा ने बताया- इस सेंटर के शुरू होने का सबसे ज्यादा फायदा उन मरीजों के लिए जो शराब या दूसरे नशे के एडिक्ट हो गए हैं। उनको ये लत छोड़ने में परेशानी हो रही है। NDDTC से आने वाली दवाएं विशेष रूप से ऐसे मरीजों के लिए होती है, जिनको नशे की जबरदस्त लत होती है। एक पैसा नहीं होगा खर्च एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी के नोडल अधिकारी डॉ. धर्मदीप सिंह ने बताया- इस योजना के तहत अब मनोचिकित्सा केंद्र में केवल नशा छुड़ाने की शुरुआती दवाएं ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक नशे से दूर रखने वाली दवाएं भी मरीजों को दी जा रही हैं। शराब छोड़ने के बाद होने वाली तलब कम करने वाली दवाएं, अफीम और स्मैक जैसे ओपिओइड नशे के लिए मेडिकेशन असिस्टेड ट्रीटमेंट के साथ-साथ गांजा, नींद की गोलियों और अन्य नशों के उपचार की दवाएं भी निःशुल्क दी जा रही हैं। इस पूरे इलाज के दौरान मरीज का एक भी पैसा खर्च नहीं होगा। 20 से 45 साल की उम्र के मरीज सबसे ज्यादा डॉक्टर धर्मदीप सिंह ने बताया- हमारे पास मनोचिकित्सा केंद्र में शराब, अफीम, स्मैक, हेरोइन, डोडा-पोस्त, तंबाकू, गुटखा, बीड़ी-सिगरेट, गांजा, नींद की गोलियों और अन्य नशीले पदार्थों की लत से छुटकारा पाने के लिए बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। इनमें अधिकांश मरीजों की उम्र 20 से 45 वर्ष के बीच होती है। हमारे यहां दवाओं के साथ मरीजों और उनके परिजनों की काउंसलिंग भी की जाती है, ताकि दोबारा नशे की ओर लौटने की संभावना कम हो।