जैसलमेर के सम और कनोई इलाके में सूर्यास्त के बाद रेगिस्तान में पर्यटकों की आवाजाही और ऊंट सफारी पर रोक लगा दी है। होटलों में रात के समय लेजर लाइट चलाने और रेगिस्तान में कचरा-प्लास्टिक फेंकने पर भी पाबंदी लगाई गई है। नियमों का पालन कराने के लिए विभाग ने होटल यूनियन के अध्यक्ष को पत्र लिखकर होटल संचालकों और पर्यटन से जुड़े लोगों को निर्देश दिए हैं। उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। रेगिस्तान में कचरा और प्लास्टिक फेंकने पर रोक वन विभाग के पत्र के मुताबिक, सम और कनोई इलाके के कुछ होटल संचालक खुले जंगल और रेगिस्तान में कचरा डाल रहे हैं। वहीं, घूमने आने वाले पर्यटक भी जगह-जगह गंदगी फैला रहे हैं। विभाग ने होटल संचालकों को कचरे का उचित निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। रेगिस्तान में प्लास्टिक की थैलियां, कांच की बोतलें और अन्य कचरा फेंकने पर रोक रहेगी। होटल संचालकों को वहां ठहरने वाले पर्यटकों को भी साफ-सफाई बनाए रखने के लिए जागरूक करना होगा। रात में लेजर लाइट चलाने पर पाबंदी वन विभाग ने रात के समय होटलों में लेजर लाइट के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई है। पत्र में कहा गया है कि लेजर लाइट से जंगली जानवरों की शांति और उनके प्राकृतिक रहवास में खलल पड़ता है। ऐसे में जानवरों की सुरक्षा के लिए सभी होटल संचालकों और पर्यटन से जुड़े लोगों को इस निर्देश का पालन करना होगा। सूर्यास्त के बाद ऊंट सफारी समेत सभी गतिविधियां बंद वन विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सूर्यास्त के बाद पर्यटकों को रेगिस्तान के संबंधित इलाके में जाने की अनुमति नहीं होगी। इस समय के बाद ऊंट सफारी और घूमने-फिरने जैसी सभी पर्यटन गतिविधियां बंद रहेंगी। होटल संचालकों, ऊंट सफारी चलाने वालों और पर्यटन से जुड़े अन्य लोगों को नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया है। स्टाफ और पर्यटकों को भी जागरूक करना होगा वन विभाग ने होटल संचालकों से कहा है कि वे अपने कर्मचारियों और होटल में आने वाले मेहमानों को पर्यावरण संरक्षण, साफ-सफाई और जंगली जानवरों की सुरक्षा के बारे में जानकारी दें। विभाग का उद्देश्य रेगिस्तान में कचरे से होने वाले प्रदूषण को रोकना और वन्यजीवों के प्राकृतिक रहवास को सुरक्षित रखना है।