जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्र के खुहड़ी गांव से आगे बसे मानेरी गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक घर में बेहद जहरीला सांप निकल आया। जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में सुबह करीब 5 बजे एक महिला पानी पीने के लिए उठी थी। जैसे ही उसकी नजर मटके के पास पड़ी, वहां काले रंग का एक सांप बैठा दिखाई दिया, जिस पर सफेद धारियां बनी हुई थीं। महिला ने बिना घबराए तुरंत परिवार के लोगों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद स्नेक कैचर साहिल खान को फोन कर बुलाया गया। साहिल खान अपने साथी ईश्वर सिंह के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और महज 30 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद सांप को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। सांप की पहचान और खासियत इस सांप को वैज्ञानिक भाषा में 'सिंध करैत' कहा जाता है। यह भारत में पाए जाने वाले सबसे विषैले और खतरनाक सांपों में गिना जाता है। यह अक्सर रात के समय ही बाहर निकलता है और बहुत शांत स्वभाव का होता है, लेकिन खतरा महसूस होने पर ही हमला करता है। इसका जहर सीधा तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर असर करता है, जिससे समय पर इलाज न मिले तो इंसान की जान जा सकती है। लोकमान्यता और भ्रम पश्चिमी राजस्थान और मारवाड़ इलाके में स्थानीय लोग इसे 'पीवना' या 'चोर सांप' के नाम से जानते हैं। इलाके में सालों से यह भ्रम फैला हुआ है कि यह सांप रात को सोते हुए इंसान के सीने पर बैठकर उसकी सांसें पी लेता है। वैज्ञानिक और वन्यजीव विशेषज्ञ इस बात को पूरी तरह खारिज करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक पुरानी भ्रांति है। कोई भी सांप सांस नहीं पीता, बल्कि यह रात में शिकार की तलाश में निकलता है और अनजाने में इंसान का हाथ या पैर लगने पर काट लेता है। सुरक्षित स्थान पर छोड़ा स्नेक कैचर साहिल खान ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान पूरी सावधानी बरती गई ताकि सांप को कोई नुकसान न पहुंचे। रेस्क्यू के बाद टीम इसे आबादी वाले इलाके से दूर ले गई और जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया। सांप के पकड़े जाने के बाद ही परिवार और गांव के लोगों ने राहत की सांस ली।