जैसलमेर जिले के जीरो आरडी पर सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। किसानों ने कहा कि 1254 आरडी से पीछे के क्षेत्रों के किसानों का नेतृत्व मजबूत है और वहां के जनप्रतिनिधियों के राजनीतिक दबाव के कारण जैसलमेर जिले के हिस्से का पानी प्रभावित हो रहा है। किसानों ने स्थानीय विधायकों और नेताओं की कमजोरी को इसके लिए जिम्मेदार बताया। उनका कहना है कि समय रहते आवाज नहीं उठाई गई तो किसान भुखमरी और आर्थिक तंगी के कगार पर पहुंच सकते हैं। कर्ज लेकर बोई फसलें, अब आंखों के सामने सूख रहीं धरना स्थल पर किसानों ने नहर विभाग और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना है कि उन्होंने मेहनत और कर्ज लेकर खेतों में फसलें बोई थीं, लेकिन समय पर पानी नहीं मिलने से अब फसलें आंखों के सामने सूख रही हैं। उनका आरोप है कि नहर विभाग के अधिकारी उनकी समस्या के प्रति उदासीन हैं और मनमाने तरीके से पानी का वितरण किया जा रहा है। इससे नहर के टेल एंड यानी आखिरी छोर के किसानों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप आंदोलन के दौरान किसानों ने जनप्रतिनिधियों और विधायकों पर भी सवाल उठाए। किसानों का आरोप है कि 1254 आरडी से पीछे के क्षेत्रों के किसानों का नेतृत्व मजबूत होने के साथ वहां के जनप्रतिनिधियों का राजनीतिक दबाव है। इसी वजह से जैसलमेर जिले के हिस्से का पानी प्रभावित हो रहा है। किसानों ने कहा कि स्थानीय विधायक और नेता समय रहते मजबूती से आवाज नहीं उठाते हैं तो इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ेगा। समाधान नहीं हुआ तो सड़क जाम की चेतावनी तीसरे दिन हुई महापंचायत में किसानों ने चेतावनी दी कि जिला प्रशासन और सरकार ने जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। किसान सड़क जाम करने और उग्र प्रदर्शन की रणनीति पर भी विचार कर रहे हैं। फिलहाल जीरो आरडी पर प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक फसलों को बचाने के लिए पर्याप्त सिंचाई पानी नहीं मिलता, धरना खत्म नहीं किया जाएगा।